प्रतापगढ़ में हर्षोल्लास के साथ दशहरा मेला सम्पन्न, रावण दहन के साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश
उप्र के प्रतापगढ़ जनपद के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक दशहरा मेला हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। विजयदशमी के अवसर पर भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया और इसके प्रतीक स्वरूप रावण के पुतले का दहन किया गया।
प्रतापगढ़ से विकास गुप्ता की रिपोर्ट
प्रतापगढ़/जनमत न्यूज़। उप्र के प्रतापगढ़ जनपद के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक दशहरा मेला हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। विजयदशमी के अवसर पर भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया और इसके प्रतीक स्वरूप रावण के पुतले का दहन किया गया।
इस दौरान पूरा जनपद उत्सव के रंग में डूबा नजर आया। प्रतापगढ़ की रामलीला समिति आजादी से पहले से रामलीला की परंपरा को आगे बढ़ाती आ रही है। समिति द्वारा लगभग 78 वर्षों से लगातार रामलीला का मंचन किया जा रहा है।
यहां प्रतिदिन रामायण के विभिन्न प्रसंगों पर आधारित मनमोहक झांकियां निकाली जाती हैं। इनमें शिव बारात और राम बारात प्रमुख आकर्षण रहती हैं। विजयदशमी के दिन रामलीला मैदान में बुराई के प्रतीक रावण के पुतले का दहन किया गया। प्रतापगढ़ के इस ऐतिहासिक रावण की एक खास पहचान भी है।
बताया जाता है कि रावण के धड़ तक का लगभग 20 फीट ऊंचा मिट्टी का हिस्सा एक मुस्लिम कारीगर द्वारा तैयार किया गया है, जो सालभर यहां खड़ा रहता है। स्थानीय परंपरा के अनुसार, दशहरा आयोजन की शुरुआत से ही इस पुतले को खड़ा करने की परंपरा चली आ रही है। इसकी खासियत यह भी बताई जाती है कि बरसात के मौसम में भी इस पर खास असर नहीं पड़ता।
विजयदशमी से शुरू होने वाला यह मेला तीन दिनों तक चलता है। मेले में प्रतापगढ़ के अलावा आसपास के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। यहां लगने वाले विभिन्न झूले और मनोरंजन के साधन बच्चों से लेकर बड़ों तक के आकर्षण का केंद्र रहते हैं।
यही वजह है कि स्थानीय लोगों को हर साल इस ऐतिहासिक दशहरा मेले का बेसब्री से इंतजार रहता है। दशहरा पर्व एक बार फिर समाज को संदेश दे गया कि अंततः सत्य की जीत होती है और असत्य व बुराई का अंत निश्चित है।



