छतरपुर के रामपुर घाट में हो रहा है अवैध मौरम खनन, एक ही माइनिंग कंपनी का है रसूख
मध्यप्रदेश के छतरपुर में मौरम पट्टेधारक यूफोरिया माइंस एंड मिनरल्स प्रोपराइटर चंद्रशेखर चौरसिया का डंका बज रहा है।
बुंदेलखंड से आशीष सागर दीक्षित की रिपोर्ट
रामपुर घाट/छतरपुर/ जनमत न्यूज। मध्यप्रदेश के छतरपुर में मौरम पट्टेधारक यूफोरिया माइंस एंड मिनरल्स प्रोपराइटर चंद्रशेखर चौरसिया का डंका बज रहा है। लाल मौरम का यह ठेकदार मूलतः छतरपुर निवासी है लेकिन राज्य की राजधानी भोपाल मे रहकर सत्ता के गठजोड़ से मल्होत्रा ग्रुप के सानिध्य मे बेलगाम मौरम खनन कराने मे सक्रिय है।
केन नदी मे रामपुर घाट पर सीधे प्रतिबंधित लिफ्टर डालकर मौरम उत्खनन किया जा रहा है। जिले मे कई साल से मुस्तैद खान अधिकारी अमित मिश्रा के आशीर्वाद से समूचे छतरपुर की केन नदी त्राहिमाम कर रही है।
बुंदेलखंड मध्यप्रदेश के जिला छतरपुर मे एक ही खनन अर्थात माइनिंग कंपनी का रसूख चल रहा है।
स्थानीय सूत्रधार वरिष्ठ पत्रकार लक्ष्मीकांत शर्मा और संजय अवस्थी आदि की मानें तो गोयरा थाना क्षेत्र के रामपुर घाट मे केन नदी पर सीधे लिफ्टर डालकर रातदिन लाल मौरम का उत्खनन हो रहा है।
वहीं बीच जलधारा में पोकलैंड मशीन से खनन किया जाता है। जबकि मशीनों से लोडिंग और अन लोडिंग ही की जा सकती है। केन नदी से लाल मौरम मानव श्रम से निकालने का प्रावधान है, जिससे नदी की जैवविविधता, पर्यावरणीय पारिस्थितिकी तंत्र को खतरा न पहुंच सके।
केन नदी मे प्रतिबंधित लिफ्टर डालने से नदी की गहराई तक लाल मौरम निकासी हो रही है। जबकि महज 3 मीटर ही खनन का नियम है। अथवा जहां कम पानी है वहां खनन वर्जित होता है।
किंतु गोयरा के रामपुर घाट मे यूफोरिया माइंस एंड मिनरल्स द्वारा एनजीटी और सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देश को ताक पर रखकर भयावह तरीके से अवैध खनन चल रहा है। जिससे संरक्षित जलीय जीव का नुकसान हो रहा है। वहीं नदी की दिशा और दशा बदल रही है।
उक्त पत्रकारों एवं स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर, दिव्या अहिरवार, अनिल सोनी ने बताया कि पूरे छतरपुर में एक ही माइनिंग कंपनी का ठेका है। यही पूर्व में पन्ना भी चलाती थी।
यूपी और मध्यप्रदेश के बार्डर का बेजा लाभ लेकर केन नदी मे लिफ्टर चल रहें है। जबकि वनविभाग का पूर्व सर्वेक्षण बतलाता है कि केन नदी मे संरक्षित डॉल्फिन मछली भी पाई जाती है।
वहीं PTR (पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र) के बफर जोन मे कई तरह के विलुप्त जलीय जीवों का प्रवास रहता है। उन्हें भी जलधारा मे खनन होने से छतरपुर और पन्ना के मध्य भारी क्षति पहुंचाई जा रही है। स्थानीय किसानों की सिंचाई का पानी मौरम माफिया लिफ्टर से निकालकर बर्बाद करते है।
उन्होंने कहा कि इसी केन नदी पर केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से विश्वबैंक द्वारा अनुदानित 41 हजार करोड़ से ज्यादा की बहुउद्देशीय केन बेतवा नदी लिंक परियोजना भी आश्रित है।
जिसके बांध का निर्माण कार्य पीटीआर के डूब क्षेत्र वाले गांव दौधन मे गंगऊ डैम की शक्ल मे बन रहा है। अत्यधिक लाल मौरम खनन से केन की जैवविविधता को नुकसान होगा जिससे यह परियोजना भी प्रभावित होगी।
उन्होंने सवाल किया कि मौरम माफिया जिस तर्ज पर पोकलैंड और लिफ्टर से केन नदी की मौरम और पानी उलीच रहा है ऐसे केन बेतवा बांध निर्माण को मौरम कहां से उपलब्ध होगी? बुंदेलखंड के ग्रेनाइट पहले ही पहाड़ माफिया के शिकंजे मे है। उन्हीं से केन नदी को मौरम भंडार भी मिलता है।
खान अधिकारी अमित मिश्रा का जलवा
छतरपुर के खान अधिकारी अमित मिश्रा कुछ वर्ष से जिले मे है। स्थानीय पत्रकारों ने उन पर गंभीर आरोप लगाए है। उन्होंने कहा कि खान अधिकारी की कृपा से लाल मौरम के रसूखदार ठेकेदारों का इकबाल बुलंद है। वहीं मोटी आमदनी से खान अधिकारी का जलवा जलाल है।
खान अधिकारी की लापरवाही और भ्रष्टाचार की बदौलत रामपुर घाट, आसपास के समस्त खंडों में बड़े स्तर पर प्रतिबंधित लिफ्टर से खनन होता है। यूपी की सरहद का लाभ लेकर माफिया प्रशासन और सरकार के राजस्व को चूना लगाते है।
वहीं कार्यवाही के नाम पर खानापूर्ति होती रहती है। केन नदी के जल पर छत्तरपुर और बांदा की आबादी पेयजल को निर्भर रहती है। आज उसी नदी को नेस्तनाबूद करने का खुला अभियान मौरम माफिया को खुली छूट देकर चल रहा है।

Janmat News 
