पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन पर माथापच्ची, राहुल गांधी करेंगे समाधान; दिल्ली जा सकता है चन्नी गुट
पंजाब कांग्रेस में 'पावर गेम' को लेकर चल रही खींचतान दिल्ली पहुंचने वाली है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के खेमे ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं हुआ तो वे दिल्ली में शक्ति प्रदर्शन करेंगे।
चंडीगढ़/जनमत न्यूज़। पंजाब कांग्रेस में 'पावर गेम' को लेकर चल रही खींचतान दिल्ली पहुंचने वाली है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के खेमे ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं हुआ तो वे दिल्ली में शक्ति प्रदर्शन करेंगे।
चन्नी गुट के नेता दिल्ली में भी हाईकमान के सामने वैसा ही प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे हैं जैसा गत शनिवार को प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल के समक्ष किया गया था। चन्नी गुट प्रदेश प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को हटाने की मांग पर अड़ा है।
बघेल ने स्पष्ट कहा है कि मौजूदा फैसले में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा, लेकिन वह पार्टी नेताओं की बात हाईकमान तक पहुंचा देंगे। चन्नी गुट को उम्मीद है कि उनके पक्ष में बड़ी संख्या में विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के समर्थन को देखते हुए कांग्रेस हाईकमान जल्द हस्तक्षेप करेगा।
दिल्ली में शक्ति प्रदर्शन को तैयार
शनिवार को बैठक में चन्नी गुट के 92 हलकों के मौजूदा और पूर्व विधायक तथा चुनाव लड़ चुके नेता 2027 के चुनाव में अपनी टिकट पक्की करने के लिए दिल्ली में शक्ति प्रदर्शन का हिस्सा बनने के लिए खुशी-खुशी तैयार हैं।
विदेश से राहुल गांधी भी लौट आए हैं और संभावना है कि भूपेश बघेल से स्थिति की रिपोर्ट लेने के बाद वह पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, उनके गुट के सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, ओपी सोनी व परगट सिंह बातचीत के लिए इसी सप्ताह दिल्ली बुला सकते हैं।
बघेल की मौजूदगी में राणा गुरजीत सिंह के घर इकट्ठा हुए चन्नी गुट के नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि कांग्रेस के जमीन से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं की बात न सुनी गई तो आगामी चुनाव में कांग्रेस पार्टी का सत्ता हासिल करने का लक्ष्य पूरा नहीं होगा।
बघेल के सामने क्या मांग रखी?
बघेल के सामने सभी नेताओं ने दो बार हाथ उठाकर नेतृत्व परिवर्तन की मांग भी रखी थी। अब हाईकमान के सामने पशोपेश की स्थिति इसलिए भी है क्योंकि प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने पार्टी के संगठन विस्तार और मजबूती के लिए काफी काम किया है।
इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे में यदि गुटबाजी दूर नहीं हुई तो 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। कांग्रेस में गुटबाजी की स्थिति पहली बार नहीं बनी है।
2022 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में ऐसी स्थिति बनी थी जब नवजोत सिंह सिद्धू की अगुवाई में नेताओं की नाराजगी के कारण कैप्टन अमरिंदर सिंह को सीएम के पद से हटाया गया था। इससे पहले राजिंदर कौर भट्ठल की कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ खेमाबंदी से भी पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा था।


