राजस्थान HC के नाम से फर्जी जमानत आदेश पर अदालत सख्त, SIT गठित करने के निर्देश
राजस्थान हाईकोर्ट के नाम से कथित तौर पर फर्जी जमानत आदेश तैयार कर आरोपी को राहत दिलाने के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने के निर्देश दिए हैं।
जयपुर/जनमत न्यूज़। राजस्थान हाईकोर्ट के नाम से कथित तौर पर फर्जी जमानत आदेश तैयार कर आरोपी को राहत दिलाने के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने के निर्देश दिए हैं।
जोधपुर पुलिस आयुक्त को डीएसपी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में SIT बनाने और जांच में साइबर क्राइम विशेषज्ञों की मदद लेने को कहा गया है। अदालत ने जांच की प्रगति रिपोर्ट हर 15 दिन में पेश करने के भी निर्देश दिए हैं।
न्यायाधीश चंद्रशेखर शर्मा की पीठ ने 5 नवंबर को आरोपी कलविंद्र सिंह पनेसर की जमानत अवधि बढ़ाने संबंधी याचिका पर सुनवाई के दौरान यह मामला सामने आने के बाद निर्देश जारी किए।
पत्नी की सर्जरी के लिए मिली थी 30 दिन की अंतरिम जमानत
सुनवाई के दौरान सामने आया कि आरोपी कलविंद्र सिंह पनेसर को पत्नी की सर्जरी कराने के आधार पर 6 मई को 30 दिन की अंतरिम जमानत दी गई थी। इसके लिए उसे दो लाख रुपये की राशि जमा करानी थी। साथ ही जमानत की अवधि पूरी होने के बाद जेल में आत्मसमर्पण करना अनिवार्य था।
हालांकि, जेल प्रशासन की ओर से अदालत में पेश रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी 9 जून को निर्धारित समय सीमा बीतने के बावजूद जेल वापस नहीं लौटा। इस पर हाईकोर्ट ने उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की।
जमानत मुचलके रद्द, गिरफ्तारी वारंट जारी
अदालत ने आरोपी के जमानत मुचलके रद्द कर दिए और उसके जमानतदारों की जमा राशि जब्त करने का आदेश दिया। इसके साथ ही आरोपी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। संबंधित पुलिस अधीक्षक को उसे तत्काल गिरफ्तार करने के निर्देश भी दिए गए।
तीन तारीखों के जमानत आदेश निकले फर्जी
मामले की सुनवाई के दौरान 12, 15 और 26 अक्तूबर की तारीखों वाले तीन कथित जमानत आदेश अदालत के सामने पेश किए गए। इन आदेशों की प्रामाणिकता की जांच के लिए हाईकोर्ट के न्यायिक रिकॉर्ड का मिलान किया गया तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ।
रिकॉर्ड के अनुसार, इन तीनों तारीखों पर संबंधित मामला अदालत में सूचीबद्ध ही नहीं था। साथ ही संबंधित पीठ की ओर से कोई जमानत आदेश भी पारित नहीं किया गया था। इसके बाद अदालत ने तीनों आदेशों को फर्जी और जाली करार दिया।
रजिस्ट्रार ने दर्ज कराई एफआईआर, हर 15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट
इस मामले में हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (न्यायिक) नरेंद्र कुमार ने जोधपुर के कुड़ी भगतासनी पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। अब जोधपुर पुलिस आयुक्त को डीएसपी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच टीम गठित करनी होगी। जांच में साइबर क्राइम विशेषज्ञों का सहयोग भी लिया जाएगा।
हाईकोर्ट ने एसआईटी को प्रत्येक 15 दिन में जांच की प्रगति रिपोर्ट पेश करने और पूरे मामले की जानकारी मुख्य न्यायाधीश को भेजने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि न्यायिक आदेशों की प्रामाणिकता से खिलवाड़ न्यायिक संस्थाओं की साख और विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।



