इटावा: दर्द से तड़पते मरीज के लिए फरिश्ता बने CMS डॉ. परितोष शुक्ला, पेश की इंसानियत की मिसाल
उप्र के इटावा जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. परितोष शुक्ला ने संवेदनशीलता और इंसानियत की एक अनुपम मिसाल पेश की है।
इटावा से पुनीत दीक्षित की रिपोर्ट
इटावा/जनमत न्यूज़। उप्र के इटावा जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. परितोष शुक्ला ने संवेदनशीलता और इंसानियत की एक अनुपम मिसाल पेश की है।
एक तरफ जहां उन्होंने दशहरा पर्व के दिन दोपहर 12 बजे तक अस्पताल की OPD और अन्य सभी चिकित्सा सेवाएं सुचारू रूप से चालू रखवाईं, वहीं दूसरी ओर अस्पताल परिसर के बाहर लावारिस हालत में तड़प रहे एक गंभीर मरीज की जान बचाकर यह साबित कर दिया कि एक डॉक्टर के लिए इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं होता है।
घटना के दौरान डॉ. परितोष शुक्ला के पास एक फोन आया जिसमें सूचना मिली कि अस्पताल के बाहर एक व्यक्ति दर्द से करा रहा है और उसके पेट से लगातार रक्तस्राव हो रहा है।
सूचना मिलते ही उन्होंने बिना किसी देरी के अपने स्टाफ को तुरंत निर्देशित किया और उस मरीज को, जिसकी पहचान मुकेश कुमार निवासी घटिया अजमत अली के रूप में हुई, तत्काल इमरजेंसी वार्ड में एडमिट कराया। उन्होंने खुद मौके पर पहुंचकर मरीज की स्थिति का जायजा लिया और तुरंत समुचित इलाज व हरसंभव सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
इस संकट की घड़ी में समाजसेवी सौरभ पाठक भी मददगार के रूप में आगे आए, जो पिछले एक महीने से इस मरीज की देखरेख कर रहे थे। उन्होंने भी अपनी इंसानियत का फर्ज निभाते हुए इस मानवतापूर्ण कार्य में पूरा सहयोग दिया।
शुरुआत में मौके पर मौजूद कुछ लोग स्थिति को ठीक से समझे बिना उस व्यक्ति को सिर्फ शराबी समझकर अनदेखा कर रहे थे, हालांकि इस बात की कोई पुष्टि नहीं हुई है कि उसने शराब का सेवन किया था, या वह किसी जहर खुरानी का शिकार हुआ था या फिर किसी अन्य गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। ऐसे हालात में भी बिना किसी पूर्वाग्रह के मरीज को प्राथमिकता देना समाज के लिए एक बड़ा संदेश है।
इस पूरी घटना के बाद मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. परितोष शुक्ला और समाजसेवी सौरभ पाठक ने समाज के नाम एक बेहद प्रेरणादायक संदेश दिया है कि चाहे कोई गरीब हो या किसी भी अन्य वर्ग का व्यक्ति हो, हर जरूरतमंद की मदद के लिए हमेशा आगे आना चाहिए



