अमेठी में आस्था के साथ सेवा-समरसता का संदेश, सावन के अंतिम सोमवार पर वकीलों ने कराया भंडारा
पवित्र श्रावण मास के अंतिम सोमवार को अधिवक्ताओं के सहयोग से उप्र के अमेठी जनपद के सिविल कोर्ट परिसर मुसाफिरखाना में भंडारे का आयोजन किया गया।
अमेठी से राम मिश्रा की रिपोर्ट
अमेठी/जनमत न्यूज़। पवित्र श्रावण मास के अंतिम सोमवार को अधिवक्ताओं के सहयोग से उप्र के अमेठी जनपद के सिविल कोर्ट परिसर मुसाफिरखाना में भंडारे का आयोजन किया गया।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक भंडारा शुरू होने से पूर्व सिविल जज मुसाफ़िरखाना दीपांशी चौधरी ने भगवान शिव के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पुष्प अर्पित किए और भगवान शिव का पूजन किया।
इस अवसर पर सिविल जज ने कहा कि न्यायिक कार्यो से जुड़े सभी लोगों का दायित्व है कि वे अपने कर्तव्यों के निर्वहन के साथ-साथ समाज में सौहार्द,सहयोग एवं मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों में भी सकारात्मक सहभागिता करें।
बार एसोसिएशन मुसाफ़िरखाना के अध्यक्ष वेद प्रकाश शुक्ल ने कहा कि श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है।इस पवित्र माह में भगवान शिव की पूजा-अर्चना,जलाभिषेक और भक्ति करने से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है।उन्होंने कहा कि श्रावण के अंतिम सोमवार को भंडारे का आयोजन सामाजिक समरसता और सेवा भावना का प्रतीक है।
वरिष्ठ उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार शुक्ल एडवोकेट ने कहा कि भंडारा केवल प्रसाद वितरण का आयोजन नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश भी देता है।
पूर्व अध्यक्ष बिन्देश्वरी प्रसाद मिश्रा एडवोकेट ने कहा कि सावन मास भगवान शिव की भक्ति और आराधना का विशेष पर्व है।इस दौरान किए गए धार्मिक एवं सेवा कार्यों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
वही अधिवक्ता प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि श्रावण मास का विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व है।भगवान शिव को समर्पित इस पवित्र माह में श्रद्धा,सेवा और परोपकार का विशेष महत्व माना गया है।
भंडारे जैसे आयोजन समाज में सेवा, सद्भाव और आपसी सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं। अधिवक्ताओं द्वारा सामूहिक रूप से भंडारे का आयोजन कर प्रसाद वितरित करना सामाजिक उत्तरदायित्व और धार्मिक आस्था का सुंदर उदाहरण है।
अधिवक्ता कृष्णानंद मिश्र ने कहा कि श्रावण मास भगवान शिव की आराधना और भक्ति का पावन अवसर है।भंडारे के माध्यम से प्रसाद वितरित करने के साथ ही समाज में आपसी भाईचारे, सहयोग और सेवा की भावना को बढ़ावा मिलता है।
ऐसे धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन हमारी सनातन परंपराओं को मजबूत करने का कार्य करते हैं। भंडारे में अधिवक्ताओं के साथ न्यायालय के लिपिक,स्टाम्प विक्रेता एवं वादकारियों ने प्रसाद ग्रहण किया।इस दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला.




