मिर्जापुर: पूर्व IAS दिव्या मित्तल का बड़ा ऐलान, यूपी की सभी 403 विधानसभा सीटों पर उतारेंगी प्रत्याशी
उप्र के मिर्जापुर जनपद के चुनार क्षेत्र के भ्रमण के दौरान पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने बड़ा राजनीतिक ऐलान किया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर जहां जरूरत होगी
मिर्जापुर से आनन्द तिवारी की रिपोर्ट
मिर्जापुर/जनमत न्यूज़। उप्र के मिर्जापुर जनपद के चुनार क्षेत्र के भ्रमण के दौरान पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने बड़ा राजनीतिक ऐलान किया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर जहां जरूरत होगी और अच्छे प्रत्याशी मिलेंगे, वहां से प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे जाएंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनार विधानसभा सीट से भी अपना प्रत्याशी चुनाव लड़ाएंगी। दिव्या मित्तल के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू क्योंकी लोगो को पहले लगता था की यह सत्ता पक्ष मे गठवन्धन कर सकती लेकिन तल्ख तेवर साबित कर दिया क्रांतिकारियों के पीछे कारवां आज भी तैयार खड़ा है।
भले ही सत्ता पक्ष में बैठे लोग पुलिस प्रशासन का सहारा लेते हैं। लोगों पर फर्जी मुकदमे करवाते हैं संपत्तियों को हड़पने का खेल चलता है। परिवार के लोगों को प्रताड़ित किया जाता है लेकिन जब जनता को न्याय की आवश्यकता होती है तो उसके लिए अपना सब कुछ निछावर करने के लिए तैयार होती है।
जिस तरह से आज मिर्जापुर जिले की जनता दिव्या मित्तल के साथ जी जान से लगी है वह कहीं ना कहीं दिव्या मित्तल के निस्वार्थ भाव का प्रतीक है। सत्ता के गलियारे तक पहुंचाने का रास्ता मिर्जापुर जिले की 5 विधानसभाओं से होकर के गुजरता है लेकिन अब दिव्या मित्तल मिर्जापुर जिले में एक मजबूत चट्टान और दीवाल की तरह खड़ी है क्योंकि सत्ता और सिस्टम को हिलाने की महारत रखती है।
इनके साथ लोगों का जन सैलाब और कारवां बढ़ता ही जा रहा जिसका प्रमाण यहां के सांसद और विधायकों के बीच मची खलबली देखने को मिलती है। अब सांसद और विधायक भी जनता के बीच उतरने लगे नहीं तो अंग्रेजों के शासनकाल में मिर्जापुर व्यापारिक हब था लेकिन आज वही मिर्जापुर बदहाली का शिकार हो चुका है।
यहां बनाई गई इमारतें जो कि आज भी अपनी एक अलग गाथा कहती नजर आ रही है पीतल के बर्तनों का व्यवसाय मिर्जापुर शहर की पहचान थी। साथ ही साथ चुनार तहसील की बात करें तो यहां चीनी मिट्टी के बर्तन बनाने के कारखाने थे लेकिन सत्ता की चकाचौध नेसब कुछ निकाल लिया मिर्जापुर के गुलाबी पत्थरजो कि आज भी लखनऊ के अंबेडकर पार्क की कहानी की नई इबारत लिख रहे हैं।



