मुजफ्फरनगर के जानसठ में अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट पर सवाल, दो सेंटरों के बीच एक घंटे में बदली जांच की तस्वीर

उप्र के मुजफ्फरनगर जनपद के जानसठ क्षेत्र में अल्ट्रासाउंड जांच की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है।

मुजफ्फरनगर के जानसठ में अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट पर सवाल, दो सेंटरों के बीच एक घंटे में बदली जांच की तस्वीर
Published By- Diwaker Mishra

मुजफ्फरनगर से संजय कुमार की रिपोर्ट

मुजफ्फरनगर/जनमत न्यूज़। उप्र के मुजफ्फरनगर जनपद के जानसठ क्षेत्र में अल्ट्रासाउंड जांच की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है।

रॉयल अल्ट्रासाउंड सेंटर और मनोकामना अल्ट्रासाउंड सेंटर से जुड़ा यह मामला स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाता है। एक ही व्यक्ति की जांच रिपोर्ट में कथित तौर पर महज एक घंटे के अंतराल में बड़ा अंतर सामने आने के बाद पीड़ित ने संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

प्राप्त शिकायत के अनुसार, एक व्यक्ति ने रॉयल अल्ट्रासाउंड सेंटर पर अल्ट्रासाउंड कराया था। आरोप है कि वहां से मिली रिपोर्ट में दोनों किडनी में पथरी, फैटी लिवर ग्रेड-2 तथा गंभीर बीमारी से संबंधित निष्कर्ष बताए गए। रिपोर्ट मिलने के बाद व्यक्ति काफी चिंतित हो गया।

इसके बाद स्थानीय चिकित्सक की सलाह पर उसने मनोकामना अल्ट्रासाउंड सेंटर पर दोबारा जांच कराई। पीड़ित का दावा है कि करीब एक घंटे बाद मिली दूसरी रिपोर्ट में सब कुछ सामान्य बताया गया। दोनों रिपोर्टों में कथित विरोधाभास सामने आने के बाद पीड़ित के सामने यह सवाल खड़ा हो गया कि आखिर किस रिपोर्ट को सही माना जाए।

यदि पहली रिपोर्ट सही है तो दूसरी रिपोर्ट में संबंधित समस्याएं क्यों नहीं दिखाई दीं? वहीं, यदि दूसरी रिपोर्ट सही है तो पहली रिपोर्ट में गंभीर बीमारी और दोनों किडनी में पथरी बताए जाने का आधार क्या था? इन सवालों का जवाब विशेषज्ञों की निष्पक्ष जांच और दोनों रिपोर्टों के चिकित्सकीय परीक्षण से ही सामने आ सकता है।

प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को भेजा प्रार्थना पत्र

पीड़ित ने इस मामले में उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य विभाग एवं चिकित्सा सेवाएं, लखनऊ को लिखित प्रार्थना पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की है। शिकायत में संबंधित नोडल अधिकारी की कथित लापरवाही पर भी सवाल उठाए गए हैं। पीड़ित ने दोनों अल्ट्रासाउंड सेंटरों की कार्यप्रणाली, जांच करने वाले व्यक्तियों की योग्यता और पंजीकरण संबंधी अभिलेखों की जांच कराए जाने की मांग की है।

बिना पंजीकृत डॉक्टर के जांच करने का आरोप

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जानसठ स्थित मनोकामना अल्ट्रासाउंड सेंटर पर मेहताब नामक व्यक्ति तथा रॉयल अल्ट्रासाउंड सेंटर पर भी कथित तौर पर अप्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा अल्ट्रासाउंड किए जाने की आशंका है।

पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि दोनों केंद्रों पर पंजीकृत एवं योग्य चिकित्सकों की उपलब्धता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। संबंधित केंद्रों के पंजीकरण, चिकित्सकीय योग्यता और जांच प्रक्रिया की आधिकारिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर उठे सवाल

अल्ट्रासाउंड जांच किसी भी मरीज के इलाज की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में यदि एक ही व्यक्ति की रिपोर्टों में इतने कम समय के अंतराल में गंभीर अंतर सामने आता है, तो मामले को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

इससे मरीज मानसिक तनाव में आ सकता है और उपचार को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि दोनों केंद्रों की रिपोर्टों, मशीनों, पंजीकरण प्रमाणपत्रों, संबंधित चिकित्सकों की योग्यता तथा जांच करने वाले व्यक्तियों की भूमिका की नियमानुसार जांच कराई जाए।

अब जांच और कार्रवाई का इंतजार

पीड़ित ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों और संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि दोनों रिपोर्टों में अंतर किन कारणों से आया। फिलहाल शिकायतकर्ता के आरोपों पर विभागीय जांच और संबंधित पक्षों का आधिकारिक जवाब सामने आना बाकी है।

अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है और जानसठ के रॉयल अल्ट्रासाउंड सेंटर तथा मनोकामना अल्ट्रासाउंड सेंटर की जांच के बाद मरीज को उसकी रिपोर्टों के अंतर का क्या जवाब मिलता है।