टैरिफ में कटौती को वाइट हाउस ने भी माना भारत की जीत, मोदी-ट्रंप की दोस्ती को दिया क्रेडिट
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में टेलीफोन पर बात की। इसके बाद यूएस टैरिफ 50 प्रतिशत से घटकर 18 पर आ गया।
वाशिंगटन/जनमत न्यूज़। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में टेलीफोन पर बात की। इसके बाद यूएस टैरिफ 50 प्रतिशत से घटकर 18 पर आ गया। दोनों देशों के बीच हुए व्यापार समझौते पर वाइट हाउस ने गुरुवार को बयान जारी किया है।
इसमें दोनों देशों के लिए एक स्पष्ट जीत करार दिया है। वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने सोशल मीडिया और प्रेस ब्रीफिंग के माध्यम से इस सौदे के रणनीतिक और आर्थिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच मजबूत संबंधों का परिणाम बताया।
इस समझौते की सबसे बड़ी शर्त ऊर्जा आयात से जुड़ी है। प्रेस सचिव लेविट के अनुसार, भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद करने और इसके विकल्प के रूप में अमेरिका से ऊर्जा आयात बढ़ाने पर सहमति जताई है।
लेविट ने संकेत दिया कि भारत अपनी जरूरतों के लिए वेनेजुएला से भी तेल आयात कर सकता है, जिस पर अब अमेरिकी नियंत्रण काफी बढ़ गया है। उन्होंने कहा, "भारत अब न केवल रूसी तेल खरीदना बंद करेगा, बल्कि अमेरिका से तेल खरीदेगा, जिसका सीधा लाभ अमेरिकी लोगों और अर्थव्यवस्था को होगा।"
वाइट हाउस ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका में 500 अरब डॉलर (करीब 42 लाख करोड़ रुपये) के निवेश का संकल्प लिया है। यह निवेश मुख्य रूप से परिवहन, ऊर्जा और कृषि उत्पाद के क्षेत्र में किया जाएगा। आयोग ने इसे 'मेक इन अमेरिका' और 'बाय अमेरिकन' नीति की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि भारत के प्रति मित्रता और सम्मान दिखाते हुए अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर लगने वाले पारस्परिक टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर रहा है।
इससे पहले भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने के कारण अमेरिका ने 25% का अतिरिक्त 'पेनल्टी टैरिफ' लगाया था, जिसे अब पूरी तरह हटा दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे 'मेक इन इंडिया' उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बड़ी बढ़त मिलेगी।
भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि इस व्यापार समझौते में भारत के संवेदनशील क्षेत्रों, जैसे कृषि और डेयरी, के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों को सुरक्षा प्रदान की गई है ताकि भारतीय किसानों और छोटे व्यापारियों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
यह समझौता ऐसे समय में आया है जब भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ (EU) और ब्रिटेन (UK) के साथ भी महत्वपूर्ण व्यापारिक बातचीत पूरी की है। भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता यह सहयोग न केवल व्यापार तक सीमित है, बल्कि क्वाड (Quad) और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रक्षा और तकनीकी साझेदारी को भी नई मजबूती प्रदान करेगा।

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