रायबरेली में SIR प्रक्रिया पर गंभीर सवाल, एक ही समुदाय के 99 मतदाताओं पर आपत्ति; सियासी हलचल तेज
उप्र के रायबरेली शहर में चल रही SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के तहत एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रायबरेली से महताब खान की रिपोर्ट
रायबरेली/ जनमत न्यूज़। उप्र के रायबरेली शहर में चल रही SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के तहत एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शहर के बूथ संख्या 166 पर श्रीराम नामक व्यक्ति द्वारा एक ही समुदाय के 99 मतदाताओं के नामों पर फॉर्म-7 के तहत आपत्तियां दाखिल किए जाने का मामला उजागर हुआ है। इस खुलासे के बाद जिले के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
प्रभावित मतदाताओं का कहना है कि उनके नाम वर्षों से मतदाता सूची में दर्ज हैं और वे उसी पते पर लगातार निवास कर रहे हैं। इसके बावजूद सुनियोजित तरीके से एक खास समुदाय को निशाना बनाकर वोट कटवाने की साजिश रची जा रही है, जो बेहद चिंताजनक है।
मामला उस वक्त और गंभीर हो गया जब संबंधित बीएलओ शीला श्रीवास्तव ने स्वयं कथित आपत्तिकर्ता श्रीराम से फोन पर बातचीत की। बीएलओ के अनुसार, श्रीराम ने साफ तौर पर कहा कि उन्होंने किसी भी प्रकार की आपत्ति दाखिल नहीं की है। इस बयान के बाद पूरे प्रकरण की निष्पक्षता और सत्यता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह मामला सिर्फ एक बूथ तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के कई बूथों पर एक ही समुदाय के मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने का प्रयास किया जा रहा है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह लोकतंत्र की जड़ों पर सीधा हमला माना जाएगा।
फिलहाल पीड़ित मतदाता और विभिन्न राजनीतिक दल पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, दोषियों की पहचान और कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इन गंभीर आरोपों पर क्या कदम उठाता है और मतदाता सूची की पवित्रता को कैसे सुनिश्चित करता है।

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