अजित पवार: ऐसे शख्स, जो कभी नहीं हुए सत्ता से बाहर; महाराष्ट्र की राजनीति में हमेशा रहे ‘पावर फुल’

महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार का प्लेन क्रैश में निधन हो गया है। जानकारी के मुताबिक हादसे में अजित पवार बुरी तरह घायल हो गए थे.

अजित पवार: ऐसे शख्स, जो कभी नहीं हुए सत्ता से बाहर; महाराष्ट्र की राजनीति में हमेशा रहे ‘पावर फुल’
Published By- Diwaker Mishra

मुंबई/जनमत न्यूज़। महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार का प्लेन क्रैश में निधन हो गया है। जानकारी के मुताबिक हादसे में अजित पवार बुरी तरह घायल हो गए थे और उन्हें इलाज के लिए स्थानीय मेडिकल कॉलेज ले जाया गया था, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

विमान में 5 लोग सवार थे, जिनमें से किसी को बचाया नहीं जा सका। अजित पवार के पीएसओ समेत 2 क्रू मेंबर्स की भी हादसे में मौत हो गई है। अजित पवार का प्लेन बारामती में दुर्घटनाग्रस्त हुआ जहां से वे विधायक थे।

2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपने भतीजे युग्रेंद्र पवार को इसी सीट से हराकर जीत दर्ज की थी। इससे पहले अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे कद्दावर राजनेताओं में से एक रहे।

उनके बारे में यह कहा जाता है कि अजित पवार एक ऐसे शख्स थे जिन्हें कभी सत्ता से बाहर नहीं किया जा सकता था। हालांकि उपमुख्यमंत्री पद के लिए कई बार रिकॉर्ड बनाने वाले को कभी मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं मिली।

अजित पवार का राजनीतिक सफर

अजित पवार को राजनीतिक जमीन विरासत में मिली थी। उनका जन्म 22 जुलाई 1959 को हुआ था और छोटी उम्र से ही उन्होंने राजनीति को अपना लिया।

महज 23 साल की उम्र में अजित पवार कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री के बोर्ड में शामिल हो गए थे। इसके बाद 1991 में वे पुणे सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष बने और 16 सालों तक इस पद पर काबिज रहे। वे 1991 में ही बारामती से पहली बार सांसद चुने गए।

अजित पवार 1995 में महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव के लिए बारामती सीट से खड़े हुए और इसके बाद उन्होंने लगातार कई चुनाव जीते। 2024 में लगातार सात बार इस सीट से विधानसभा विधायक बने। वह 6 बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री भी बने।

अजित पवार महाराष्ट्र में कई मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाल चुके थे। उन्होंने 1999 में विलासराव देशमुख की सरकार में उन्होंने सिंचाई मंत्रालय का प्रभार संभाला। इसके बाद वे ग्रामीण विकास मंत्री भी रहे।

2004 में जब दोबारा एनसीपी-कांग्रेस की सरकार बनी तो अजित पवार को जल संसाधन मंत्रालय दिया गया। 2009 से 2014 के बीच पृथ्वीराज सरकार में भी उनके पास अलग-अलग मंत्रालय रहे।