बलरामपुर: तुलसीपुर के फोरलेन परियोजना में सड़क चौड़ीकरण को लेकर लोग आक्रोशित, प्रभावितों ने की पारदर्शिता की मांग
बलरामपुर जनपद के तुलसीपुर क्षेत्र में हर्रैया चौराहा से सिरिया नाला तक प्रस्तावित SH-158 फोरलेन/ओवरब्रिज परियोजना के तहत चल रहे सड़क चौड़ीकरण को लेकर स्थानीय भू-स्वामियों ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
बलरामपुर से गुलाम नबी कुरैशी की रिपोर्ट
बलरामपुर/जनमत न्यूज़। उप्र के बलरामपुर जनपद के तुलसीपुर क्षेत्र में हर्रैया चौराहा से सिरिया नाला तक प्रस्तावित SH-158 फोरलेन/ओवरब्रिज परियोजना के तहत चल रहे सड़क चौड़ीकरण को लेकर स्थानीय भू-स्वामियों ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
अवस्थानी लोगों में इसको लेकर काफी आक्रोश देखा जा रहा है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि परियोजना क्षेत्र में Right of Way (ROW) को लेकर स्पष्टता नहीं है, जिससे लोगों में असमंजस और असंतोष बढ़ रहा है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार सड़क के अलग-अलग हिस्सों में ROW की चौड़ाई भिन्न दिखाई दे रही है। कहीं इसे 9 मीटर, कहीं 13 मीटर और कुछ स्थानों पर 15 मीटर बताया जा रहा है।
उनका आरोप है कि पूरे खंड में एक समान 15 मीटर मानते हुए कई संपत्तियों को अतिक्रमण की श्रेणी में रखा जा रहा है, जबकि जमीन की वास्तविक स्थिति अलग-अलग है।
प्रभावित परिवारों का कहना है कि परियोजना के दौरान कुछ भू-स्वामियों से सहमति के आधार पर भुगतान कर पंजीकृत बैनामे कराए गए हैं, जबकि अन्य लोगों को अतिक्रमण बताकर हटाने की चेतावनी दी जा रही है।
ऐसे में वे सवाल उठा रहे हैं कि यदि भूमि अतिक्रमण थी तो उसका विधिवत बैनामा कैसे संभव हुआ, और यदि वह निजी स्वामित्व की भूमि थी तो समान परिस्थितियों वाले अन्य लोगों को अतिक्रमणकारी क्यों माना जा रहा है।
निवासियों ने यह भी दावा किया कि उन्हें अधिग्रहण से संबंधित गजट अधिसूचना, मुआवजा निर्धारण की गणना, अवार्ड की प्रति या विधिवत नोटिस उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर कई बार नोटिस दिए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनके रिकॉर्ड में ऐसा कोई लिखित नोटिस मौजूद नहीं है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि स्वीकृत ROW का आधिकारिक मानचित्र सार्वजनिक किया जाए, अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराए जाएं और सभी प्रभावितों के साथ समान एवं पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए। उनका कहना है कि वे विकास कार्यों के विरोध में नहीं हैं, बल्कि विधिसम्मत प्रक्रिया और न्यायपूर्ण व्यवहार की अपेक्षा रखते हैं।

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