पुलिस ने चोरी के बड़े गिरोह का किया पर्दाफाश
गुलाम नबी की विशेष रिपोर्ट ...
बलरामपुर (जनमत) : यूपी बलरामपुर जिले में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं पर रोक लगाने में कोतवाली देहात पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने स्कूलों, पंचायत भवनों और सरकारी परिसरों को निशाना बनाकर चोरी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में चोरी का इलेक्ट्रॉनिक सामान, सोलर उपकरण, वाहन और अन्य सामग्री बरामद की गई है। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से सरकारी भवनों में योजनाबद्ध तरीके से चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहा था।
पुलिस जांच के अनुसार पिछले कुछ महीनों में प्राथमिक विद्यालयों, पंचायत भवनों और निर्माणाधीन मकानों से एलसीडी, कंप्यूटर, प्रिंटर, सीसीटीवी कैमरे, इन्वर्टर, सोलर पैनल, मोटर पंप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चोरी होने की कई घटनाएं सामने आई थीं। इन मामलों में अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए थे। लगातार बढ़ रही घटनाओं को देखते हुए पुलिस ने विशेष टीम बनाकर निगरानी बढ़ाई थी।
रात्रि गश्त के दौरान पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि चोरी का सामान लेकर एक कार क्षेत्र से गुजर रही है। सूचना मिलते ही पुलिस ने घेराबंदी कर क्विड कार को रोका। वाहन की तलाशी लेने पर उसमें बड़ी मात्रा में चोरी का इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद हुआ। कार में सवार दो आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो पूरे गिरोह की परतें खुलने लगीं। आरोपियों ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर कई सरकारी संस्थानों में चोरी की वारदातें कबूल कीं।
आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने ग्राम गंगापुर बांकी के बाहरी इलाके में स्थित एक खंडहर मकान पर छापा मारा। वहां से बाकी चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और बड़ी मात्रा में चोरी का सामान बरामद हुआ। बरामद सामग्री में एलईडी और एलसीडी टीवी, कंप्यूटर मॉनिटर, पांच सीपीयू, प्रिंटर, कीबोर्ड, माउस, यूपीएस, इन्वर्टर, सोलर पैनल, बैटरियां, सीसीटीवी कैमरे, डीवीआर, वाईफाई डिवाइस, मोटर पंप, गैस सिलेंडर और अन्य उपकरण शामिल हैं। पुलिस ने गिरोह के इस्तेमाल में लाई गई मोटरसाइकिल और कार भी बरामद की है।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि वे पहले सरकारी भवनों की रेकी करते थे और ऐसे स्थान चुनते थे जहां रात में कोई नहीं रहता था। चोरी से पहले भवनों में लगे सीसीटीवी कैमरों को तोड़ दिया जाता था और डीवीआर से हार्ड डिस्क निकालकर डाटा नष्ट कर दिया जाता था, ताकि पुलिस को कोई सुराग न मिल सके। चोरी के बाद सामान को खंडहर मकान में छिपाकर रखा जाता था और बाद में बेचने की तैयारी की जाती थी।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में से एक का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है, जिस पर पहले से चोरी और अन्य मामलों में मुकदमे दर्ज हैं। अन्य आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
लगातार हो रही चोरी की घटनाओं से परेशान स्थानीय लोगों ने पुलिस की कार्रवाई को राहत भरा बताया है। स्कूलों और पंचायत भवनों से सरकारी संसाधनों की चोरी से जहां बच्चों की पढ़ाई और सरकारी योजनाओं पर असर पड़ रहा था, वहीं इस खुलासे के बाद लोगों में सुरक्षा को लेकर भरोसा बढ़ा है।

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