SIR Logical Discrepancy में भवानीपुर, बालीगंज समेत दक्षिण कोलकाता के मुसलमान सबसे ज्यादा; राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज
चुनाव आयोग के मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) के एक अध्ययन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
कोलकाता/जनमत न्यूज़। चुनाव आयोग के मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) के एक अध्ययन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पाया गया है कि दक्षिण कोलकाता के दो राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्रों में जिन वोटर्स में विसंगति पाई गई, उनमें मुस्लिम श्रेणी के वोटर्स सबसे ज्यादा थे। इस पर अध्ययन सबार इंस्टीट्यूट ने किया है।
शोध के अनुसार, शहर के पारंपरिक वाणिज्यिक और राजनीतिक केंद्र के आसपास स्थित मध्य-दक्षिण कोलकाता के निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर में तार्किक विसंगति (Logical Discrepancies) के अंतर्गत चिह्नित मतदाताओं में से लगभग 52% मुस्लिम हैं, और दक्षिण कोलकाता के एक समीपवर्ती पॉश आवासीय क्षेत्र बालीगंज में यह संख्या लगभग 78% है।
अध्ययन से पता चलता है कि भवानीपुर में, 15,145 मतदाताओं में से 7,846 मुस्लिम हैं, जिनके जनगणना प्रपत्रों में logical discrepancies के कारण निशान लगाए गए थे। बालीगंज में इसी श्रेणी के 30,008 मतदाताओं में से 23,256 अल्पसंख्यक समुदाय से हैं।
तार्किक विसंगति में 52 फीसदी मुस्लिम
अन्य श्रेणियों में हटाए गए या संशोधित किए गए मतदाताओं की तुलना में यह असमानता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। अध्ययन करने वाले आशिन चक्रवर्ती ने सौप्तिक हल्दर और साबिर अहमद के साथ मिलकर यह अध्ययन किया।
आशिन ने कहा कि भवानीपुर में, 'अनुपस्थित, स्थानांतरित या मृत/डुप्लिकेट' (ASD) के रूप में चिह्नित मतदाताओं में मुस्लिम केवल 22.7% हैं और बिना मानचित्रित मतदाताओं में लगभग 26% हैं।
ये आंकड़े 2011 की जनगणना के अनुसार निर्वाचन क्षेत्र में मुस्लिम आबादी के लगभग 20% हिस्से से काफी हद तक मेल खाते हैं। लेकिन 'तार्किक विसंगति' के तहत, यह अनुपात तेजी से बढ़कर 52% हो जाता है।
चुनाव आयोग ने आरोप किए खारिज
बालीगंज में भी ऐसा ही पैटर्न देखने को मिलता है, जहां एएसडी मतदाताओं में मुसलमानों की संख्या लगभग 44% और अनमैप्ड मतदाताओं में 42% है, जो निर्वाचन क्षेत्र में उनकी अनुमानित 50% जनसंख्या हिस्सेदारी के करीब है।
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने पक्षपात के आरोपों को खारिज कर दिया। एक चुनाव आयोग अधिकारी ने कहा कि मतदाता सूची में धर्म का रिकॉर्ड नहीं होता और आयोग धर्मवार मतदाता डेटा नहीं रखता है।
TMC ने मसलमानों को टारगेट करने का लगाया आरोप
इसको लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तीखी रहीं। राजनीतिक विश्लेषक उदययन बंद्योपाध्याय ने आरोप लगाया कि SIR के लिए इस्तेमाल किया गया AI प्रोग्राम अल्पसंख्यक मतदाताओं, विशेषकर महिलाओं को परेशान करने के लिए जानबूझकर बनाया गया था।
TMC प्रवक्ता कुणाल घोष ने भाजपा पर मुस्लिम बहुल क्षेत्रों को निशाना बनाने के लिए मतदाता सूची संशोधन का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
इन निष्कर्षों ने कोलकाता में SIR प्रक्रिया में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है और सॉफ्टवेयर-आधारित तार्किक विसंगति फ़िल्टर की ऑडिट की मांग बढ़ रही है। मांग की जा रही है कि ऑडिट किया जाए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संशोधन प्रक्रिया किसी भी समुदाय को असमान रूप से प्रभावित न करे।
बंगाल भाजपा प्रमुख सामिक भट्टाचार्य ने इस आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि इस मुद्दे का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है और आरोप लगाया कि अवैध प्रवासियों को मतदाता के रूप में नामांकित किया गया है।

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