अयोध्या: भू-माफियाओं की नजर में फंसा पौराणिक महाभरसर कुंड, रास्ता बंदकर उखाड़ा शिलालेख; सीएम योगी से लगाई गुहार
उप्र के अयोध्या जनपद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप प्राचीन कुंडों और धार्मिक स्थलों का कायाकल्प हो रहा है, वहीं मोहबरा धाम का पौराणिक श्री महाभरसर कुंड उपेक्षा की मार झेल रहा है।
अयोध्या से आज़म खान की रिपोर्ट
अयोध्या/जनमत न्यूज़। उप्र के अयोध्या जनपद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप प्राचीन कुंडों और धार्मिक स्थलों का कायाकल्प हो रहा है, वहीं मोहबरा धाम का पौराणिक श्री महाभरसर कुंड उपेक्षा की मार झेल रहा है। कुंड तक पहुंचने वाला मुख्य रास्ता बंद कर दिया गया है।
अंग्रेजों के जमाने का ऐतिहासिक 65वां शिलालेख उखाड़कर दुकान पर रख दिया गया है और आसपास की जमीन पर कब्जे का खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भूमाफियाओं की नजर कुंड की जमीन पर टिकी है।
सीएम योगी से लगाई गुहार
केंद्रीय विद्यालय बस्ती के पूर्व प्राचार्य संत लाल करुण ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर कुंड के उद्धार की मांग की है। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग से कुंड की पैमाइश कराई जाए, अतिक्रमण की जांच हो, बंद पड़ा मुख्य मार्ग खुलवाया जाए और कुंड का जीर्णोद्धार कराया जाए।
संत लाल करुण के मुताबिक, स्कंद पुराण और रुद्रयामल के शिव-पार्वती संवाद में इस कुंड का उल्लेख मिलता है। यह भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ा पौराणिक स्थल है। अंग्रेज कलेक्टर के समय अयोध्या के एक संत के प्रयास से लगाए गए 100 से अधिक शिलालेखों में 65वां शिलालेख इसी कुंड का था, जिसे सड़क चौड़ीकरण के दौरान उखाड़ दिया गया।
नगर निगम ने लिया संज्ञान
मामला सामने आने के बाद नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार ने संज्ञान लेते हुए जांच का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि पहले यह तय किया जाएगा कि कुंड किस विभाग के अधीन है। यदि कुंड नगर निगम को हस्तांतरित है तो निगम स्वयं सफाई और संरक्षण कराएगा, अन्यथा पर्यटन विभाग से समन्वय कर जीर्णोद्धार कराया जाएगा।
उन्होंने कुंड के प्राचीन स्वरूप को बनाए रखते हुए सौंदर्यीकरण और बजट की व्यवस्था का भी भरोसा दिलाया। संत लाल करुण ने चेतावनी दी है कि समय रहते पैमाइश और संरक्षण नहीं हुआ तो सप्तसागर कुंड की तरह महाभरसर कुंड का भी अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने दशरथ कुंड और गिरजा कुंड की तर्ज पर इसके विकास की मांग की है।



