वक्फ दर्ज मस्जिद की जमीन पर दुकान निर्माण को लेकर आमने-सामने आए दो पक्ष, मामला न्यायालय में विचाराधीन
मस्जिद की भूमि वक्फ रिकॉर्ड में दर्ज है और वर्षों से एक पक्ष वहां व्यवसाय कर रहा था। आरोप है कि हाल ही में मस्जिद कमेटी ने यह कहते हुए पुराने काबिज लोगों को हटा दिया कि यहां नई दुकानों का निर्माण कराया जाएगा और बाद में उन्हें नए किराए पर पुनः दुकानें आवंटित की जाएंगी।
फतेहपुर से भीम शंकर की रिपोर्ट —
फतेहपुर/जनमत न्यूज। जनपद फतेहपुर में वक्फ बोर्ड में दर्ज एक मस्जिद की जमीन पर दुकान निर्माण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। शहर की साइकल ग्रान मस्जिद, जो कई दशकों से वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज बताई जा रही है, उसी जमीन पर नई दुकानों के निर्माण को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए हैं। मामला अब न्यायालय में विचाराधीन है और प्रशासन ने फिलहाल इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
जानकारी के अनुसार संबंधित मस्जिद की भूमि वक्फ रिकॉर्ड में दर्ज है और वर्षों से एक पक्ष वहां व्यवसाय कर रहा था। आरोप है कि हाल ही में मस्जिद कमेटी ने यह कहते हुए पुराने काबिज लोगों को हटा दिया कि यहां नई दुकानों का निर्माण कराया जाएगा और बाद में उन्हें नए किराए पर पुनः दुकानें आवंटित की जाएंगी।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि हटाए जाने के बाद अब उन्हें दुकानें नहीं दी जा रहीं और उनके साथ अन्याय किया गया है। उनका कहना है कि वे वर्षों से वहां रोजगार कर रहे थे और अब उन्हें बेदखल कर दिया गया है।
वहीं मस्जिद कमेटी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कमेटी का कहना है कि संबंधित परिवार के पूर्वज वर्षों पहले पाकिस्तान से भारत आए थे, उस समय मानवीय आधार पर उन्हें रोजगार के लिए जगह दी गई थी। अब वे लोग झूठे आरोप लगाकर दुकान पर कब्जा जमाना चाहते हैं। कमेटी ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य में अवैध धन लेन-देन नहीं हुआ है। जो भी किराया पूर्व में लिया जाता था, उसकी विधिवत रसीद जारी की जाती थी।
कमेटी का यह भी कहना है कि मस्जिद की जमीन पर हो रहा निर्माण कार्य चंदे के माध्यम से कराया जा रहा है। भविष्य में नई दुकानों से प्राप्त होने वाला किराया मस्जिद के रख-रखाव, देखरेख और धार्मिक गतिविधियों में खर्च किया जाएगा।
मस्जिद कमेटी ने इस विवाद के पीछे भूमाफियाओं की साजिश होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कुछ लोग वक्फ की जमीन पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रहे हैं। कमेटी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath से मामले में संज्ञान लेकर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। साथ ही समाजवादी पार्टी से जुड़े कुछ लोगों पर भी आरोप लगाए गए हैं, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
बताया जा रहा है कि मस्जिद से जुड़ी जमीन पर निर्माण को लेकर मामला न्यायालय में लंबित है और धारा 10 के तहत कार्रवाई विचाराधीन है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत राजस्व परिषद एक पीठ गठित करती है, जिसमें संबंधित अधिकारियों और कमेटी सदस्यों की बहुमत के आधार पर निर्णय लिया जाता है। जब तक अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक मौके पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश हैं, अर्थात किसी भी पक्ष का कब्जा वैध रूप से मान्य नहीं होगा।
जिला प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फिलहाल कोई आधिकारिक बयान देने से इनकार किया है। पूरे घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर अड़े हुए हैं। अब सबकी नजर न्यायालय के निर्णय पर टिकी हुई है।

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