बलिया में 22.64 लाख लोगों को खिलाई जाएगी फाइलेरिया रोधी दवा, 28 फरवरी तक चलेगा अभियान

उप्र के बलिया जनपद को फाइलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए आज से सर्वजन दवा सेवन (आईडीए) अभियान की शुरुआत की जा रही है।

बलिया में 22.64 लाख लोगों को खिलाई जाएगी फाइलेरिया रोधी दवा, 28 फरवरी तक चलेगा अभियान
Published By- Diwaker Mishra

बलिया से गणेश तिवारी की रिपोर्ट

बलिया/जनमत न्यूज़। उप्र के बलिया जनपद को फाइलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए आज से सर्वजन दवा सेवन (आईडीए) अभियान की शुरुआत की जा रही है। अभियान के तहत जिले के 12 ब्लॉकों में कुल 22 लाख 64 हजार पात्र लोगों को फाइलेरिया रोधी दवाएं खिलाई जाएंगी। यह अभियान 28 फरवरी तक चलेगा।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय यादव ने मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला में बताया कि फाइलेरिया जैसी गंभीर और दीर्घकालिक बीमारी से बचाव का एकमात्र प्रभावी उपाय फाइलेरियारोधी दवाओं का सेवन है। अभियान के दौरान आईवरमेक्टिन, डीईसी और एल्बेंडाजोल दवाएं स्वास्थ्यकर्मियों की प्रत्यक्ष निगरानी में खिलाई जाएंगी।

एक साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अत्यंत गंभीर रोगियों को छोड़कर सभी पात्र लोगों से दवा सेवन की अपील की गई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहले 51 जिलों के 782 ब्लॉकों में फैली यह बीमारी अब काफी हद तक सिमट चुकी है।

इस बार प्रदेश के 21 जिलों के 64 ब्लॉकों में ही आईडीए अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें बलिया जिले के बलिया अर्बन, रसड़ा, दुबहड़, सोनवानी, रेवती, रतसर-वयना, बैरिया, मुरलीछपरा, बासडीह, बेरुआरबारी और चिलकहर ब्लॉक शामिल हैं।

कार्यशाला के बाद उपस्थित पत्रकारों ने स्वयं दवा का सेवन कर जागरूकता का संदेश दिया। वेक्टर जनित बीमारियों के नोडल अधिकारी डॉ. अभिषेक मिश्रा ने बताया कि फाइलेरिया मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलने वाली संक्रामक बीमारी है, जो आगे चलकर दिव्यांगता का कारण बन सकती है।

उन्होंने बताया कि पहले जिले के 18 ब्लॉकों में इसका प्रसार था, लेकिन लगातार उच्च कवरेज के कारण अब केवल 12 ब्लॉकों में ही अभियान संचालित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर दवा खिलाएंगी। यदि कोई व्यक्ति घर पर उपलब्ध नहीं होता है तो आशा कार्यकर्ता के घर को डिपो बनाया गया है, जहां जाकर दवा का सेवन किया जा सकता है।

दवा खाली पेट नहीं लेनी है और सेवन के बाद चक्कर या जी मिचलाना जैसे हल्के लक्षण आने पर घबराने की जरूरत नहीं है। किसी भी आपात स्थिति के लिए ब्लॉक स्तर पर रैपिड रिस्पॉन्स टीमें गठित की गई हैं।

सीएमओ ने बताया कि आईडीए अभियान पांच स्तंभों- प्रत्यक्ष निगरानी में दवा सेवन, रुग्णता प्रबंधन एवं रोकथाम, वेक्टर नियंत्रण, विभागीय समन्वय और समुदाय की भागीदारी पर आधारित है। अभियान में शिक्षा, पंचायती राज, यूपीएसआरएलएम सहित कई विभागों का सहयोग रहेगा। डिजिटल टूल्स के माध्यम से रियल-टाइम रिपोर्टिंग भी की जाएगी।

कार्यशाला को विश्व स्वास्थ्य संगठन के जोनल कोऑर्डिनेटर डॉ. मंजीत सिंह चौधरी ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर अपर मुख्यचिकित्साधिकारी डॉ. पदमावती गौतम, डॉ. योगेन्द्र दास, डिप्टी डीआईओ डॉ. शशि प्रकाश, जिला मलेरिया अधिकारी राजीव त्रिपाठी तथा पाथ, पीसीआई और सीफार के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।