संजय सेतु दो माह रहेगा बंद, लखनऊ–देवीपाटन संपर्क पर असर; वैकल्पिक मार्ग की उठी मांग

करीब 42 वर्ष पूर्व वर्ष 1984 में निर्मित यह पुल लखनऊ को देवीपाटन मंडल के बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर और गोंडा जनपदों से जोड़ता है। इतना ही नहीं, नेपाल से होने वाले आवागमन और व्यापारिक गतिविधियों के लिए भी यह सेतु अत्यंत महत्वपूर्ण कड़ी है।

संजय सेतु दो माह रहेगा बंद, लखनऊ–देवीपाटन संपर्क पर असर; वैकल्पिक मार्ग की उठी मांग
PUBLISHED BY - MANOJ KUMAR

बहराइच से रिजवान खान की रिपोर्ट —

बहराइच/जनमत न्यूज। लखनऊ से देवीपाटन मंडल के चारों जनपदों और भारत–नेपाल सीमा को जोड़ने वाला एकमात्र प्रमुख संपर्क मार्ग संजय सेतु पुल अब मरम्मत कार्य के चलते दो माह तक बंद किया जाएगा। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) द्वारा पुल की जर्जर स्थिति को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। जैसे ही पुल बंद होने की सूचना सार्वजनिक हुई, क्षेत्र में हलचल मच गई और लोगों ने वैकल्पिक व्यवस्था की मांग तेज कर दी।

करीब 42 वर्ष पूर्व वर्ष 1984 में निर्मित यह पुल लखनऊ को देवीपाटन मंडल के बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर और गोंडा जनपदों से जोड़ता है। इतना ही नहीं, नेपाल से होने वाले आवागमन और व्यापारिक गतिविधियों के लिए भी यह सेतु अत्यंत महत्वपूर्ण कड़ी है। क्षेत्रीय लोगों के अनुसार संजय सेतु केवल एक पुल नहीं, बल्कि लाखों लोगों के दैनिक जीवन, रोजगार और आपूर्ति व्यवस्था की जीवनरेखा है।

वर्षों पुराने इस पुल में समय-समय पर तकनीकी खराबियां, दरारें और संरचनात्मक कमजोरी सामने आती रही हैं। विशेषज्ञों द्वारा निरीक्षण में इसकी हालत चिंताजनक पाई गई है। इसी के मद्देनजर एनएचएआई ने पत्र जारी कर पुल को लगभग दो माह तक पूरी तरह बंद कर व्यापक मरम्मत कार्य कराने का निर्णय लिया है।

संजय सेतु से प्रतिदिन लगभग 40 से 45 हजार छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। इनमें निजी वाहन, मालवाहक ट्रक, बसें, एंबुलेंस, स्कूल वाहन और अन्य आपातकालीन सेवाएं शामिल हैं। पुल बंद होने की स्थिति में इन सभी को 55 से 65 किलोमीटर तक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे समय, ईंधन और लागत में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। व्यापारिक गतिविधियों और आपूर्ति श्रृंखला पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

पुल की स्थिति को गंभीर मानते हुए बहराइच सांसद डॉ. आनंद गोंड ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर छह लेन के नए पुल के निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि क्षेत्र की बढ़ती आबादी और यातायात दबाव को देखते हुए स्थायी समाधान आवश्यक है।

जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने पुष्टि की है कि एनएचएआई की ओर से पुल के मरम्मतीकरण को लेकर पत्र प्राप्त हुआ है। वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए लोक निर्माण विभाग और एनएचएआई के बीच समन्वय और विचार-विमर्श चल रहा है। प्रशासन का कहना है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए जल्द ही उपयुक्त निर्णय लिया जाएगा, ताकि आम जनता को न्यूनतम असुविधा हो।

पुल बंद होने की खबर के बाद वाहन चालकों, व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से वैकल्पिक मार्ग, अस्थायी पुल या यातायात के आंशिक संचालन जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि बिना समुचित विकल्प के पुल बंद होने से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होगा।

संजय सेतु के बंद होने का निर्णय जहां एक ओर सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक गतिविधियों के लिए बड़ी चुनौती भी साबित हो सकता है। अब निगाहें प्रशासन और एनएचएआई की आगामी कार्ययोजना पर टिकी हैं।