'अमेरिका ने हमें टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल कर फेंक दिया', पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का कबूलनामा

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि उसने अपने रणनीतिक फायदे के लिए उनके देश का इस्तेमाल किया और फिर अपने मकसद पूरे होने के बाद उसे टॉयलेट पेपर के टुकड़े की तरह फेंक दिया।

'अमेरिका ने हमें टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल कर फेंक दिया', पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का कबूलनामा
Published By- Diwaker Mishra

इस्लामाबाद/जनमत न्यूज़। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि उसने अपने रणनीतिक फायदे के लिए उनके देश का इस्तेमाल किया और फिर अपने मकसद पूरे होने के बाद उसे टॉयलेट पेपर के टुकड़े की तरह फेंक दिया।

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में बोलते हुए आसिफ ने माना कि पाकिस्तान अक्सर अपने टेरर हिस्ट्री से इनकार करता है और इसे पहले के तानाशाहों की गलती कहता है। पाकिस्तानी मंत्री ने दो अफगान युद्धों में इस्लामाबाद के शामिल होने को भी एक गलती बताया और कहा कि आज पाकिस्तान में आतंकवाद पिछली गलतियों का नतीजा है।

अमेरिका के साथ दोस्ती पर क्या बोले ख्वाजा आसिफ?

आसिफ ने 1999 के बाद वॉशिंगटन के साथ पाकिस्तान के फिर से तालमेल पर बात की। खासकर अफगानिस्तान के मामले में देश को बहुत नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि 1999 के बाद खासकर 11 सितंबर, 2001 के हमलों के बाद अमेरिका के साथ फिर से जुड़ने की कीमत बहुत ज्यादा थी।

उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के साथ टॉयलेट पेपर के टुकड़े से भी बुरा बर्ताव किया गया और उसे एक मकसद के लिए इस्तेमाल किया गया और फिर फेंक दिया गया।" रक्षा मंत्री ने कहा कि 2001 के बाद के समय में अमेरिकी नेतृत्व वाले अफगान युद्ध में इस्लामाबाद ने फिर से वॉशिंगटन का साथ दिया और इस दौरान तालिबान के खिलाफ हो गया।

उन्होंने कहा कि जब अमेरिका आखिरकार इस इलाके से हट गया तो पाकिस्तान लंबे समय तक हिंसा, कट्टरता और आर्थिक तंगी से जूझता रहा। आसिफ ने इस सरकारी कहानी को भी चुनौती दी कि अफगान झगड़ों में पाकिस्तान का शामिल होना धार्मिक मजबूरी की वजह से था।

'जिहाद के नाम पर पाकिस्तानियों को भेजा गया'

उन्होंने माना कि पाकिस्तानियों को जिहाद के नाम पर लड़ने के लिए भेजा गया था और इसे गुमराह करने वाला और बहुत नुकसान पहुंचाने वाला बताया।

उन्होंने संसद को बताया कि दो पुराने मिलिट्री डिक्टेटर (जिया-उल-हक और परवेज मुशर्रफ) अफगानिस्तान की लड़ाई में इस्लाम के लिए नहीं, बल्कि एक सुपरपावर को खुश करने के लिए शामिल हुए थे। 

मंत्री ने कहा, "हम अपने इतिहास को नकारते हैं और अपनी गलतियों को नहीं मानते। आतंकवाद अतीत में तानाशाहों द्वारा की गई गलतियों का नतीजा है। हमें जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। पाकिस्तान की गलतियों को ठीक नहीं किया जा सकता।"