मतदाता सूची पुनरीक्षण में साजिश का आरोप, बीएलओ ने दबाव में हस्ताक्षर कराने का लगाया गंभीर आरोप

समाजवादी पार्टी ने प्रशासनिक तंत्र और सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं के बीच कथित अपवित्र गठजोड़ का आरोप लगाते हुए कहा है कि सुनियोजित तरीके से विपक्षी मतदाताओं, खासकर पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग के लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटने की कोशिश की जा रही है।

मतदाता सूची पुनरीक्षण में साजिश का आरोप, बीएलओ ने दबाव में हस्ताक्षर कराने का लगाया गंभीर आरोप
PUBLISHED BY - MANOJ KUMAR

बलरामपुर से गुलाम नबी की रिपोर्ट —

बलरामपुर/जनमत न्यूज। जनपद में चल रहे मतदाता सूची के विशेष वृहद पुनरीक्षण कार्यक्रम ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। समाजवादी पार्टी ने प्रशासनिक तंत्र और सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं के बीच कथित अपवित्र गठजोड़ का आरोप लगाते हुए कहा है कि सुनियोजित तरीके से विपक्षी मतदाताओं, खासकर पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग के लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटने की कोशिश की जा रही है। मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब तुलसीपुर विधानसभा क्षेत्र के एक बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) ने खुद को सत्ता पक्ष के दबाव में बताते हुए उच्चाधिकारियों से सुरक्षा और कार्रवाई की मांग की।

तुलसीपुर विधानसभा क्षेत्र के भाग संख्या-16 के बीएलओ रमेश कुमार शुक्ला ने उपजिलाधिकारी को भेजी गई लिखित शिकायत में आरोप लगाया है कि 28 जनवरी को सत्ताधारी दल से जुड़े कुछ लोगों ने उन पर दबाव बनाते हुए लगभग 100 फॉर्म-7 (मतदाता नाम विलोपन प्रपत्र) पर जबरन हस्ताक्षर करवा लिए। बीएलओ के अनुसार, उस समय भय के कारण वह विरोध नहीं कर सके, लेकिन अब उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की मांग की है। इस घटना ने मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

इस प्रकरण को लेकर समाजवादी पार्टी के पूर्व लोकसभा प्रत्याशी मसूद आलम खां ने पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ जिला निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले के कई क्षेत्रों में बाहरी एजेंटों के जरिए बीएलओ पर दबाव बनाया जा रहा है, ताकि फर्जी दस्तावेज तैयार कर विपक्षी समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकें। सपा नेताओं का कहना है कि फॉर्म-7 से जुड़ी सूचनाएं जानबूझकर गोपनीय रखी जा रही हैं, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है।

वहीं, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधान परिषद प्रत्याशी डॉ. भानु त्रिपाठी ने प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र पर सीधा हमला है। जब एक सरकारी कर्मचारी खुद असुरक्षित महसूस कर रहा है और उससे जबरन दस्तखत कराए जा रहे हैं, तो आम नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा कैसे होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं बनाई गई, तो समाजवादी पार्टी सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगी और मामले को चुनाव आयोग के मुख्यालय तक ले जाएगी।

समाजवादी पार्टी ने मांग की है कि सभी बूथों पर भरे गए फॉर्म-7 की सूची पार्टी के बूथ लेवल एजेंटों के साथ साझा की जाए और सत्ता पक्ष के दबाव में काम करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को चिन्हित कर दंडित किया जाए। फिलहाल, बीएलओ की शिकायत के बाद जिले के राजनीतिक माहौल में गर्माहट बढ़ गई है। हालांकि, इस पूरे मामले पर अब तक न तो भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है और न ही चुनावी कार्य से जुड़े किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने बयान जारी किया है।