कानपुर: स्वास्थ्य विभाग के भ्रष्टाचार की बलि चढ़ गई मासूम, किसकी कृपा से चल रहे हैं अधोमानक नर्सिंग होम?
सिस्टम की लापरवाही और स्वास्थ्य विभाग के भ्रष्टाचार रुपी दानव ने एक और मासूम को निगल लिया। सबसे दुखद पहलू यह रहा कि जन्म देने वाली मां भी जीवित रहते अपनी बच्ची का चेहरा नहीं देख पाई।
कानपुर/जनमत न्यूज़। सिस्टम की लापरवाही और स्वास्थ्य विभाग के भ्रष्टाचार रुपी दानव ने एक और मासूम को निगल लिया। सबसे दुखद पहलू यह रहा कि जन्म देने वाली मां भी जीवित रहते अपनी बच्ची का चेहरा नहीं देख पाई।
मामला उप्र के कानपुर जिले के बिठूर नगर का है जहां रविवार शाम एक निजी नर्सिंग होम के एनआईसीयू वार्ड में लगी आग ने नवजात बच्ची की जिंदगी छीन ली।
ज्ञातव्य है कि कानपुर में बिठूर थाना क्षेत्र के बिठूर कस्बा स्थित राजा नर्सिंग होम में रविवार शाम अस्पताल के एनआईसीयू वार्ड में वॉर्मर मशीन में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई।
इस हादसे में एनआईसीयू में भर्ती एक नवजात बच्ची गंभीर रूप से झुलस गई जिसकी बाद में मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और लापरवाही का आरोप लगाया।
मिली जानकारी के अनुसार, बिठूर के बाकरगंज निवासी किसान अरुण निषाद अपनी पत्नी शालू को प्रसव पीड़ा होने पर रविवार दोपहर करीब दो बजे राजा नर्सिंग होम लेकर पहुंचे थे।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने 25 हजार रुपये में ऑपरेशन करने की बात कही। शाम करीब 3 बजकर 45 मिनट पर ऑपरेशन के जरिए शालू ने बेटी को जन्म दिया।
अरुण की बहन रितु निषाद का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद करीब आधे घंटे तक अस्पताल स्टाफ ने उन्हें किसी तरह की कोई जानकारी नहीं दी। बाद में एक सफाईकर्मी से उन्हें पता चला कि बच्ची का जन्म हुआ है। इसी दौरान अचानक एनआईसीयू वार्ड में आग लग गई और पूरे अस्पताल में धुआं फैल गया।
काफी पूछताछ के बाद परिजनों को बताया गया कि एनआईसीयू में रखी नवजात आग की चपेट में आ गई है। जब उन्होंने बच्ची को देखा तो उसका चेहरा, छाती और पेट बुरी तरह झुलसा हुआ था।
परिजनों का आरोप है कि इसके बाद अस्पताल स्टाफ ने बच्ची को गंभीर हालत बताकर आनन-फानन में काकादेव स्थित चिल्ड्रेन नर्सिंग होम ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
रितु निषाद का कहना है कि बच्ची पूरी तरह जल चुकी थी और उसकी मौत पहले ही हो गई थी। घटना के बाद अस्पताल संचालक का मोबाइल फोन बंद मिला जिससे परिजनों का गुस्सा और बढ़ गया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला।
चालू हालत में नहीं था अग्निशमन यंत्र
बताया जा रहा है कि इस अस्पताल में अग्निशमन यंत्र चालू हालत में नहीं था लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने कोई निगरानी नहीं रखी। अस्पताल में लगे अग्निशमन यंत्र की रिफिलिंग 3 जून 2025 को होनी थी लेकिन इस पर न तो अस्पताल प्रबंधन ने ध्यान दिया और न ही स्वास्थ्य विभाग के निगरानी तंत्र की सात माह तक इस पर निगाह पड़ी।
अधोमानक है यह नर्सिंग होम
नर्सिंग होम के लिए कम से कम 300 वर्गमीटर भूखंड व 12 मीटर चौड़ी सड़क होनी चाहिए लेकिन यह मानक भी अस्पताल नहीं पूरा कर रहा है। इस अस्पताल में प्रवेश व निकास का एक ही द्वार है। ऐसे में यह साफ़ दिखता है कि नियमों को ताक पर रखकर कानपुर के भ्रष्ट स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी से यह नर्सिंग होम चल रहा है।
इस नर्सिंग होम का उद्घाटन 3 मई 2022 को हुआ था लेकिन अभी तक इसकी अधोमानक व्यवस्था पर किसी जिम्मेदार की नजर नहीं पड़ी या यूं कहिए जानबूझ कर नहीं पड़ी।
इतना ही नहीं, बिठूर व इसके आसपास के क्षेत्रों में करीब 1200 अधोमानक निजी नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं लेकिन कोई रोकने टोकने या देखने वाला नहीं है। साफ़ है जिम्मेदारों का मुंह ‘चांदी का जूता’ मारकर बंद किया गया है।
मामले को लेकर बिठूर थाना प्रभारी अशोक कुमार सरोज ने बताया कि परिजनों की ओर से तहरीर प्राप्त हुई है। नवजात के शव का पंचनामा भरने के बाद मामले में आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस आग लगने के कारणों और अस्पताल की लापरवाही की जांच कर रही है।

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