एनजीटी जांच से पहले खदान क्षेत्र में ‘औपचारिक’ पौधारोपण और अवैध निर्माण हटाने का आरोप

जांच टीम के लौटते ही फिर शुरू हुआ निर्माण कार्य, याचिकाकर्ता ने खनिज अधिकारियों पर साधा निशाना

एनजीटी जांच से पहले खदान क्षेत्र में ‘औपचारिक’ पौधारोपण और अवैध निर्माण हटाने का आरोप
PUBLISHED BY - MANOJ KUMAR

बांदा से आशीष सागर दीक्षित की रिपोर्ट —

बांदा/जनमत न्यूज। खंड 77 ग्राम सांडी बांगर में खनन गतिविधियों को लेकर चल रही शिकायतों के बीच नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की चार सदस्यीय जांच टीम के आगमन से ठीक पहले किए गए कार्यों पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि 17 फरवरी को ग्राम सभा के पार्क में खदान संचालक द्वारा औपचारिक तौर पर पौधारोपण कराया गया, जबकि पानी के अभाव में अधिकांश पौधे सूखने लगे हैं।

याचिकाकर्ता आशीष सागर दीक्षित ने आरोप लगाया कि शासन की मंशा और खनिज न्यास फाउंडेशन की गाइडलाइन के अनुसार प्रत्येक खंड संचालक को प्रति एकड़ 200 छायादार पौधे खनन प्रभावित गांवों में लगाना अनिवार्य है, किंतु इसका पालन नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह पौधारोपण केवल दिखावे के लिए किया गया।

इस प्रकरण में जिला खान अधिकारी राज रंजन और खान इंस्पेक्टर गौरव गुप्ता की भूमिका पर भी प्रश्न उठाए गए हैं। आरोप है कि उनके सुझाव पर ही जांच से पूर्व यह ‘नौटंकी छाप’ पौधारोपण कराया गया। वन विभाग के डीएफओ अरविंद कुमार ने सूचना के अधिकार के तहत दिए गए जवाब में बताया कि उन्होंने इस संबंध में चार बार खनिज विभाग को पत्राचार किया, लेकिन कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ।

गौरतलब है कि जांच टीम के गांव पहुंचने से पहले अवैध खनन के निशान और गड्ढों को पोकलैंड, ट्रैक्टर और जेसीबी के माध्यम से समतल किए जाने का भी आरोप है। बीते बुधवार को जांच टीम दोपहर लगभग एक बजे गांव पहुंची थी। इससे पहले सुबह दस बजे केन नदी पर बने कथित अवैध पुल को तोड़ दिया गया। हालांकि गुरुवार को टीम के लौटते ही पुल का पुनः निर्माण शुरू होने की बात सामने आई है।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि न्यू यूरेका माइंस एंड मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड के संचालक हिमांशु मीणा तथा खदान से जुड़े अन्य लोगों ने खनिज अधिकारियों के साथ मिलकर जांच टीम को गुमराह किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिले की अन्य खदानों में अवैध खनन की स्थिति इसी प्रकार की प्रशासनिक शिथिलता और मिलीभगत के कारण बनी हुई है।

हालांकि संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है। मामले ने जिले में खनन गतिविधियों और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।