बलरामपुर रोडवेज डिपो में कर्मचारियों का हंगामा, ARM पर भ्रष्टाचार और शोषण के आरोप; यात्रियों की बढ़ी समस्याएं

उप्र के बलरामपुर जनपद के रोडवेज डिपो में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया जब एआरएम गोपीनाथ दीक्षित के खिलाफ कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा।

बलरामपुर रोडवेज डिपो में कर्मचारियों का हंगामा, ARM पर भ्रष्टाचार और शोषण के आरोप; यात्रियों की बढ़ी  समस्याएं
Published By- Diwaker Mishra

बलरामपुर से गुलाम नबी कुरैशी की रिपोर्ट

बलरामपुर/जनमत न्यूज़। उप्र के बलरामपुर जनपद के रोडवेज डिपो में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया जब एआरएम गोपीनाथ दीक्षित के खिलाफ कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा।

करीब 3  घंटे तक चले जोरदार हंगामे और नारेबाजी के चलते बसों का संचालन प्रभावित रहा, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा और कई रूटों पर बसों की रफ्तार थम गई।

कर्मचारियों ने एआरएम पर भ्रष्टाचार, शोषण और मनमानी करने के आरोप लगाए। उनका कहना है कि डिपो में नकली सामान मंगाया जा रहा है और इसका असर बसों की गुणवत्ता व कर्मचारियों की सुरक्षा पर पड़ रहा है। साथ ही आरोप लगाया कि कर्मचारियों की सुविधाओं और समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद मार्ग परिवर्तन को लेकर शुरू हुआ। कर्मचारियों का आरोप है कि बिना उचित चर्चा के रूट बदले जाते हैं, जिससे संचालन व्यवस्था प्रभावित होती है और स्टाफ पर अतिरिक्त दबाव बढ़ जाता है।

इसी तनाव के बीच एक कर्मचारी इतना आक्रोशित हो गया कि उसने विरोध स्वरूप अपना सिर पटकना शुरू कर दिया। इस घटना के बाद अन्य कर्मचारी भी उसके समर्थन में उतर आए और विरोध तेज हो गया।

कर्मचारियों ने कहा कि यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी कई बार इसी तरह के मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन किए जा चुके हैं, लेकिन ठोस समाधान नहीं निकला। उनका आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रबंधन की ओर से गंभीर पहल नहीं की जाती, जिससे आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।

हंगामे की सूचना मिलते ही डिपो परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि बाद में वरिष्ठ कर्मचारियों और जिम्मेदार लोगों की समझाइश के बाद स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में आई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

बलरामपुर बस डिपो पिछले कुछ समय से प्रबंधन और संचालन संबंधी विवादों को लेकर चर्चा में बना हुआ है। कर्मचारियों का कहना है कि संवाद और पारदर्शिता की कमी के कारण बार-बार ऐसी स्थिति बन रही है। वहीं, पूरे मामले पर संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।