नेशनल हेराल्ड मामला: ED की अपील खारिज होने से फ्रंटफुट पर कांग्रेस, कहा- राजनीतिक प्रतिशोध की कहानी
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कल मंगलवार को नेशनल हेराल्ड मामले में धनशोधन के आरोपों से जुड़ी ED की याचिका पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है।
नई दिल्ली/जनमत न्यूज़। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कल मंगलवार को नेशनल हेराल्ड मामले में धनशोधन के आरोपों से जुड़ी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है।
इस राहत के बाद कांग्रेस पार्टी केंद्र सरकार और भाजपा पर हमलावर है. पार्टी के वरिष्ठ नेता व सुप्रीम कोर्ट के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि नेशनल हेराल्ड मामला राजनीतिक प्रतिशोध और उत्पीड़न की कहानी है। वहीं, कांग्रेस ने कहा कि कानून ने शोर से ज्यादा जोर से बात की है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने क्या कहा?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, ये लोग ED, CBI जैसी एजेंसियों का उपयोग करके हमारे लोगों को बदनाम कर रहे हैं। खासकर गांधी परिवार को सताने के लिए उन्होंने ये केस डाला है। नहीं तो उसमें कुछ नहीं है।
कोई FIR नहीं है। कोई व्यक्ति शिकायत डालता है और ये उस पर कार्रवाई करते हैं। जिस चीज में कोई दम नहीं है, उसमें दम भरने की कोशिश करके हमारे लोगों का उत्पीड़न करते हैं।
हमारी कांग्रेस पार्टी के बहुत से नेता, 50 बड़े नेता जो उनसे सहानुभूति नहीं रखते हैं, उनके खिलाफ ED का केस डालकर उन्हें सता रहे हैं। उन्होंने धनशोधन का मुकदमा डालकर कई लोगों को अपनी ओर किया है। कई सांसदों को अपनी ओर किया है और कई जगह सरकारें बनाई हैं।
कोर्ट से सोनिया और राहुल गांधी को राहत
कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी को मंगलवार को बड़ी राहत मिली, जब कोर्ट ने दोनों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तरफ से दोनों के खिलाफ दायर किए गए आरोपपत्र का संज्ञान लेने से इनकार कर दिया।
ED ने दोनों नेताओं को धनशोधन मामले में आरोपी बनाया है। आरोपपत्र में सोनिया और राहुल पर एसोसिएट्स जर्नल लिमिटेड (AJL) के अंतर्गत आने वाली 2000 करोड़ रुपये की संपत्ति को हड़पने का आरोप था।
इसके साथ ही कोर्ट ने ED को अपनी जांच जारी रखने की अनुमति दी और स्पष्ट किया कि आगे की जांच के लिए उसे स्वतंत्रता है। साथ ही कहा है कि ED का मामला सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से दायर एक निजी शिकायत और मजिस्ट्रेट के समन आदेशों पर आधारित है, न कि किसी प्राथमिकी पर। हालांकि, एजेंसी इस मामले से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों को इकट्ठा करना जारी रख सकती है।
क्या है नेशनल हेराल्ड मामला?
देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने 20 नवंबर 1937 को एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड (AJL) का गठन किया था। इसका उद्देश्य अलग-अलग भाषाओं में समाचार पत्रों को प्रकाशित करना था। तब AJL के अंतर्गत अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड, हिंदी में नवजीवन और उर्दू में कौमी आवाज समाचार पत्र प्रकाशित हुए।
भले ही AJL के गठन में पं. जवाहर लाल नेहरू की भूमिका थी, लेकिन इसपर मालिकाना हक कभी भी उनका नहीं रहा। क्योंकि, इस कंपनी को 5000 स्वतंत्रता सेनानी सपोर्ट कर रहे थे और वही इसके शेयर होल्डर भी थे। 90 के दशक में ये अखबार घाटे में आने लगे।
साल 2008 तक AJL पर 90 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज चढ़ गया। तब AJL ने फैसला किया कि अब समाचार पत्रों का प्रकाशन नहीं किया जाएगा। अखबारों का प्रकाशन बंद करने के बाद AJL प्रॉपर्टी बिजनेस में उतरी। बता दें कि पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री शांति भूषण और न्यायाधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू के पिता के नाम पर AJL में शेयर थे।
फिर दर्ज हुआ मामला
2012 में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडीस, पत्रकार सुमन दुबे और टेक्नोक्रेट सैम पित्रोदा के खिलाफ मामला दर्ज कराया। तब केंद्र में कांग्रेस नेतृत्व वाली UPA की सरकार थी।
सुब्रमण्यम स्वामी ने दावा किया कि यंग इंडिया लिमिटेड (YIL) ने 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति और लाभ हासिल करने के लिए गलत तरीके से निष्क्रिय प्रिंट मीडिया आउटलेट की संपत्ति को अधिग्रहित किया।
स्वामी ने यह भी आरोप लगाया कि YIL ने 90.25 करोड़ रुपये की वसूली के अधिकार हासिल करने के लिए सिर्फ 50 लाख रुपये का भुगतान किया था, जो AJL पर कांग्रेस पार्टी का बकाया था।
यह राशि पहले अखबार शुरू करने के लिए कर्ज के रूप में दी गई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि AJL को दिया गया कर्ज अवैध था, क्योंकि यह पार्टी के फंड से लिया गया था।

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