रामपुर: विधायक के बेटे का 'शाही' अंदाज, सरकारी कुर्सी पर बैठ किया अस्पताल का निरीक्षण; डॉक्टर को दिए निर्देश

उप्र के रामपुर जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में अव्यवस्थाओं को लेकर शिकायतें मिलने के बाद  स्वार-टांडा से विधायक शफीक अहमद अंसारी के बेटे उमैर अंसारी पहुंचे तो CHC अधीक्षक राजीव चंदेल ने उनके लिए अपनी कुर्सी छोड़ दी।

रामपुर: विधायक के बेटे का 'शाही' अंदाज, सरकारी कुर्सी पर बैठ किया अस्पताल का निरीक्षण; डॉक्टर को दिए निर्देश
Published By- Diwaker Mishra

रामपुर से अभिषेक शर्मा की रिपोर्ट

रामपुर/जनमत न्यूज़। उप्र के रामपुर जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में अव्यवस्थाओं को लेकर शिकायतें मिलने के बाद  स्वार-टांडा से विधायक शफीक अहमद अंसारी के बेटे उमैर अंसारी पहुंचे तो CHC अधीक्षक राजीव चंदेल ने उनके लिए अपनी कुर्सी छोड़ दी।

कुर्सी पर बैठकर विधायक के पुत्र ने सवाल जवाब किए। इस दौरान कोतवाली पुलिस भी प्रोटोकाल में शामिल रही। विधायक के बेटे के लिए कुर्सी छोड़ने पर प्रोटोकाल का मामला सुर्खियों में है।

उमैर अंसारी ने CHC में कर्मचारियों की उपस्थिति जांची और ड्यूटी रजिस्टर देखा। उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं। इस दौरान अस्पताल में संचालित मशीनों, दवा गोदाम में रखी दवाइयों और लैब में कार्यरत कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की भी जांच की गई।

चिकित्सा प्रभारी राजीव चंदेल ने बताया कि विधायक के पुत्र ने CHC का निरीक्षण किया था। अधीक्षक की कुर्सी पर बैठाने की जानकारी ली तो वह संतोषजनक जवाब नही दे पाए।

जानकारों के अनुसार, सरकारी प्रोटोकाल केवल निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों और नामित अधिकारियों को ही दिया जाता है। विधायक, सांसद, मंत्री जैसे पदों के लिए प्रशासनिक प्रोटोकाल तय होते हैं, लेकिन उनके स्वजन को स्वतः यह सुविधा प्रदान करने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

इस मामले पर नगर पंचायत नरपतनगर के चायरमने खालिद अली नें कहा कानून का मजाक बना कर रख दिया विधायक का बेटा अब निरीक्षण कर रहा है और दिशा निर्देश दे रहा है और कानून उसका पालन कर रहा है नियमों के विरुद्ध  बताते हुए प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि बिना किसी आधिकारिक पद के किसी को प्रोटोकॉल दिया जाता है, तो यह व्यवस्था की पारदर्शिता पर प्रभाव डाल सकता है।

प्रशासनिक दृष्टि से देखा जाए तो किसी भी प्रकार का निरीक्षण या निर्देश देने का अधिकार केवल अधिकृत अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को ही होता है। 

वही, इस पूरे मामले पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी cmo रामपुर डॉक्टर दीपा सिंह ने जांच बैठा दी है और आगे की कार्रवाई की जाएगी।