क्या खार्ग द्वीप बनेगा नया युद्धक्षेत्र? अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की 'कब्जे' वाली रणनीति से भड़का तेहरान
ईरान और अमेरिका के बीच मचे घमासान ने अब एक बेहद खतरनाक मोड़ ले लिया है। खाड़ी देशों से आ रही ताजा खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने अपने सबसे अहम 'खार्ग द्वीप' को एक अभेद्य किले में तब्दील करना शुरू कर दिया है।
वाशिंगटन/तेहरान/जनमत न्यूज़। ईरान और अमेरिका के बीच मचे घमासान ने अब एक बेहद खतरनाक मोड़ ले लिया है। खाड़ी देशों से आ रही ताजा खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने अपने सबसे अहम 'खार्ग द्वीप' को एक अभेद्य किले में तब्दील करना शुरू कर दिया है।
यह वही द्वीप है जिसे कब्जाने की योजना ट्रम्प प्रशासन बना रहा है। ईरान ने यहां न केवल भारी तादाद में अतिरिक्त सैन्य बल तैनात किए हैं, बल्कि अमेरिकी सैनिकों के लिए घातक जाल भी बिछाए हैं।
आर्थिक लाइफलाइन पर कब्जे की तैयारी
अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के हवाले से जानकारी मिली है कि ट्रंप प्रशासन इस छोटे से द्वीप पर जमीनी कार्रवाई करने और इसे अपने नियंत्रण में लेने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
खार्ग द्वीप ईरान के लिए किसी 'गोल्डन डक' से कम नहीं है, क्योंकि ईरान के कुल कच्चे तेल के निर्यात का लगभग 90% हिस्सा यहीं से होकर गुजरता है।
अमेरिका का मानना है कि इस द्वीप को कब्जे में लेकर वह ईरान को 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' फिर से खोलने के लिए मजबूर कर सकता है और इसे सौदेबाजी के लिए एक बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकता है।
ईरान का पलटवार, बिछाया बारूदी सुरंगों का जाल
अमेरिका की इस संभावित योजना की भनक लगते ही ईरान ने खार्ग द्वीप की सुरक्षा को कई परतों में बांट दिया है। सूत्रों का कहना है कि ईरानी सेना ने द्वीप के चारों ओर और विशेष रूप से समुद्र तट पर भारी मात्रा में 'एंटी-पर्सनल' और 'एंटी-आर्मर' माइन्स (बारूदी सुरंगें) बिछा दी हैं। यह वही इलाका है जहां अमेरिकी सेना अपने उभयचर वाहन उतार सकती है।
हवा में मौत का सामान, MANPADs की तैनाती
इतना ही नहीं, ईरान ने पिछले कुछ हफ्तों में यहां कंधे पर रखकर दागी जाने वाली सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों (MANPADs) की संख्या भी बढ़ा दी है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका जमीनी हमला करता है, तो उसे भारी सैन्य क्षति झेलनी पड़ सकती है। अमेरिकी अधिकारियों ने खुद स्वीकार किया है कि इस ऑपरेशन में अमेरिकी सैनिकों की जान जाने का जोखिम बहुत अधिक है।
अमेरिका क्या कहता है?
हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने खार्ग द्वीप पर ईरान की इन तैयारियों पर कोई भी आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। लेकिन इतिहास देखें तो तनाव पहले ही चरम पर है। 13 मार्च को अमेरिकी सेना ने इसी द्वीप पर भीषण हवाई हमले किए थे।
सेंट्रल कमांड के अनुसार, तब 90 ठिकानों को निशाना बनाया गया था, जिनमें नौसैनिक माइन स्टोरेज और मिसाइल बंकर शामिल थे। उस समय राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा था कि उन्होंने 'शालीनता' दिखाते हुए तेल बुनियादी ढांचे को निशाना नहीं बनाया था।
सहयोगियों के मन में उठते सवाल
इस बीच, राष्ट्रपति ट्रम्प के कुछ करीबी सहयोगी ही इस संभावित सैन्य अभियान की जरूरत पर सवाल उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि केवल खार्ग द्वीप पर कब्जा करने से 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' का संकट हल नहीं होगा और न ही वैश्विक ऊर्जा बाजार पर ईरान की पकड़ ढीली होगी। उनका मानना है कि यह कदम युद्ध को सुलझाने के बजाय और अधिक उलझा सकता है।

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