India-EU FTA: यूरोप में बजेगा भारत का डंका, MFN के दर्जे पर सहमति; मिलेगा बंपर फायदा
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' (MFN) का दर्जा देने पर सहमति जताई है।
नई दिल्ली/जनमत न्यूज़। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' (MFN) का दर्जा देने पर सहमति जताई है। यह प्रावधान समझौते के लागू होने की तिथि से पांच साल तक प्रभावी रहेगा।
27 जनवरी को सार्वजनिक किए गए FTA के पाठ के अनुसार, यह व्यवस्था ‘ट्रेड इन सर्विसेज’ (सेवाओं में व्यापार) अध्याय का हिस्सा है। इसके तहत लिस्टेड सेक्टर, सर्विस और सेवा प्रदाताओं को किसी भी अन्य देश के समान या उससे बेहतर व्यवहार दिया जाएगा, हालांकि यह कुछ शर्तों और सीमाओं के अधीन होगा।
किन क्षेत्रों में लागू होगा MFN
समझौते के अनुसार, दोनों पक्ष यह सुनिश्चित करेंगे कि एक-दूसरे के सेवा प्रदाताओं के साथ भेदभाव न हो और उन्हें किसी तीसरे देश को दी गई रियायतों से कम लाभ न मिले। हालांकि, यह प्रावधान कर संधियों, मानकों या प्राधिकरणों की मान्यता और विवाद निपटान प्रक्रियाओं पर लागू नहीं होगा।
इसके अलावा, सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थानीय रूप से उत्पादित और उपभोग की जाने वाली सेवाओं के लिए विशेष रियायतें देने की अनुमति भी दी गई है।
संयुक्त समिति करेगी समीक्षा
समझौते के तहत एक संयुक्त समिति चौथे वर्ष में समीक्षा करेगी। यह समीक्षा खास तौर पर यूरोपीय संघ में भारतीय छात्रों के प्रवेश और ठहराव, उनके कार्य अधिकारों तथा सेवा प्रदाताओं के अस्थायी आवागमन से जुड़े प्रावधानों पर केंद्रित होगी।
समीक्षा के आधार पर यह तय किया जाएगा कि पांच वर्ष की प्रारंभिक अवधि के बाद MFN का प्रावधान जारी रखा जाए या नहीं। यदि समिति इसे आगे बढ़ाने का निर्णय नहीं लेती है, तो MFN दर्जा देने की बाध्यता समाप्त हो जाएगी। हालांकि, पहले से दिए गए लाभ प्रभावित नहीं होंगे।
विशेष परिस्थितियों में पुनर्समीक्षा संभव
यदि किसी पक्ष को यह महसूस होता है कि बदलती परिस्थितियां उसके हितों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर रही हैं, तो वह अतिरिक्त समीक्षा का अनुरोध कर सकता है। ऐसी स्थिति में संयुक्त समिति मामले पर विचार कर निर्णय लेगी।
लंबे समय से लंबित था समझौता
भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह समझौता लंबे समय से लंबित था। पिछले महीने दोनों पक्षों ने टैरिफ में कटौती और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस व्यापक FTA पर सहमति बनाई।
विशेषज्ञों का मानना है कि सेवाओं के क्षेत्र में MFN प्रावधान से आईटी, शिक्षा, पेशेवर सेवाओं और अन्य सेवा क्षेत्रों में दोनों पक्षों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं।

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