नितीश अकेले नहीं, बिहार के सात सीएम अपने बेटों को सियासत में ला चुके; अब निशांत की बारी

बिहार की राजनीति में पारिवारिक विरासत कोई नई बात नहीं है। समय-समय पर राज्य के कई बड़े नेताओं ने अपने बाद अपनी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए अपने बेटों को राजनीति में उतारा है।

नितीश अकेले नहीं, बिहार के सात सीएम अपने बेटों को सियासत में ला चुके; अब निशांत की बारी
Published By- Diwaker Mishra

पटना/जनमत न्यूज़। बिहार की राजनीति में पारिवारिक विरासत कोई नई बात नहीं है। समय-समय पर राज्य के कई बड़े नेताओं ने अपने बाद अपनी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए अपने बेटों को राजनीति में उतारा है।

अब मुख्यमंत्री नितीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के संभावित राजनीतिक डेब्यू के साथ यह चर्चा फिर तेज हो गई है। दरअसल, बिहार के इतिहास पर नजर डालें तो अब तक सात ऐसे मुख्यमंत्री रहे हैं जिनके बेटे सक्रिय राजनीति में आए और कई ने बड़ी राजनीतिक पहचान भी बनाई।

लालू-राबड़ी की विरासत संभाल रहे तेजस्वी और तेजप्रताप

बिहार की राजनीति में सबसे चर्चित राजनीतिक परिवार लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी का है। उनके दोनों बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव सक्रिय राजनीति में हैं।

तेजस्वी यादव आज बिहार की राजनीति के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं और नेता प्रतिपक्ष के रूप में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं, जबकि तेजप्रताप यादव भी राज्य की राजनीति में सक्रिय हैं।

जगन्नाथ मिश्रा की विरासत को आगे बढ़ाते नीतीश मिश्रा

पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के बेटे नीतीश मिश्रा ने भी राजनीति में अपनी पहचान बनाई। नीतीश मिश्रा बिहार सरकार में मंत्री रह चुके हैं और भाजपा के महत्वपूर्ण नेताओं में गिने जाते हैं। वे लगातार सक्रिय राजनीति में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

भागवत झा आजाद के बेटे भी बने नेता

पूर्व मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद के बेटे कीर्ति आजाद ने भी राजनीति में कदम रखा और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। कीर्ति आजाद पहले क्रिकेटर के रूप में मशहूर हुए और बाद में राजनीति में सक्रिय होकर सांसद भी बने। वे लंबे समय तक संसद में बिहार का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं।

जीतन राम मांझी के बेटे संतोष सुमन

पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बेटे संतोष सुमन भी सक्रिय राजनीति में हैं। संतोष सुमन हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं और बिहार सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

पुराने दौर में भी दिखी थी राजनीतिक विरासत

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सत्येन्द्र नारायण सिन्हा के बेटे निखिल कुमार भी राजनीति में आए और कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे।

कर्पूरी ठाकुर के बेटे रामनाथ ठाकुर

इसी तरह समाजवादी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के बेटे रामनाथ ठाकुर भी सक्रिय राजनीति में रहे और राज्यसभा सदस्य तक बने।

अब निशांत कुमार की एंट्री पर नजर

अब सबकी नजर इस बात पर है कि नितीश कुमार के बेटे निशांत कुमार किस तरह से राजनीति में अपनी भूमिका तय करते हैं। अगर वे सक्रिय राजनीति में आते हैं तो यह बिहार की सियासत में एक और राजनीतिक विरासत का विस्तार माना जाएगा।

हालांकि राजनीति में विरासत मिलना आसान होता है, लेकिन जनता के बीच अपनी पहचान बनाना हर नेता के लिए अलग चुनौती होती है। यही कारण है कि बिहार की राजनीति में अब निशांत कुमार की संभावित पारी को लेकर उत्सुकता भी है और चर्चा भी।