शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद मामले में उमा भारती का बयान
देश/विदेश (जनमत) :- शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच टकराव और खींचतान के बीच भाजपा के अंदर भी अलग-अलग तरह के सुर सुनाई पड़ने लगे हैं। मंगलवार को मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी की वरिष्ठ नेता उमा भारती इस मुद्दे पर खुलकर शंकराचार्य के पक्ष में आ गईं। हालांकि करीब सात घंटे बाद आई दूसरी पोस्ट में उन्होंने योगी विरोधी खुशफहमी न पालें लिखकर यह सफाई भी दी की कि उनका कथन सीएम योगी के खिलाफ नहीं है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर मंगलवार को सात घंटे के अंतराल में दो पोस्ट करके उन्होंने शंकराचार्य मुद्दे पर अपना स्टैंड साफ किया।
पहली पोस्ट में उमा भारती ने जहां शंकराचार्य होने का सबूत मांगने को प्रशासन द्वारा मर्यादाओं और अधिकारों का उल्लंघन बताया तो दूसरी पोस्ट में उन्होंने योगी विरोधियों को खुश फहमी न पालने की सलाह देते हुए फिर से साफ किया कि वे अपनी इस बात पर कायम हैं कि किसी शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन है। यह सिर्फ शंकराचार्य या विद्वत परिषद कर सकते हैं।बता दें कि मौनी अमावस्या के दिन पालकी पर सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को रोके जाने के बाद से यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेले में अपने शिविर के बाहर इस मांग के साथ बैठे हुए हैं कि प्रशासन मौनी अमावस्या के दिन की गई अपनी कार्रवाई के लिए माफी मांगे और उन्हें ससम्मान स्नान कराए।

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