'हां, हमने उसे जिंदा जला दिया'; बांग्लादेश में SI संतोष की हत्या पर छात्र नेता का दावा, वीडियो वायरल

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने देशभर में आक्रोश फैला दिया है.

'हां, हमने उसे जिंदा जला दिया'; बांग्लादेश में SI संतोष की हत्या पर छात्र नेता का दावा, वीडियो वायरल
Published By- Diwaker Mishra

ढाका/जनमत न्यूज़। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने देशभर में आक्रोश फैला दिया है, जिसमें एक कथित छात्र नेता खुलेआम एक हिंदू पुलिस अफसर की लिंचिंग पर डींग मारता दिखाई दे रहा है।

यह वीडियो एक्स पर एक पत्रकार और लेखक साहिदुल हसन खोकोन ने शेयर किया था। वीडियो में युवक खुद को हबीगंज जिले का छात्र समन्वयक बताते हुए पुलिस अधिकारियों को खुलेआम धमकी देता नजर आता है।

वह कहता है कि जुलाई 2024 के आंदोलन के दौरान उन्होंने एक पुलिस स्टेशन को आग के हवाले कर दिया था और हिंदू सब-इंस्पेक्टर संतोष भाभू को जिंदा जला दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि वह यह बयान एक पुलिस थाने के भीतर बैठकर, बिना किसी डर या पछतावे के देता है।

हालांकि, जनमत न्यूज़ इस वीडियो की प्रामाणिकता, वक्ता की पहचान या वीडियो में किए गए दावों की पुष्टि नहीं कर रहा है।

पुराने जख्म एक बार फिर हरे

इस बयान ने अगस्त 2024 में हुई उस भयावह घटना को फिर से चर्चा में ला दिया है, जब हबीगंज जिले के बनियाचोंग थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर संतोष भाभू की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे से कुछ घंटे पहले हुई थी, जब इलाके में राजनीतिक तनाव चरम पर था। बताया गया कि हिंसक भीड़ ने पहले पुलिस स्टेशन पर हमला किया। आत्मरक्षा में पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी, जिसमें कुछ लोग मारे गए।

इसके बाद देर रात भीड़ दोबारा लौटी और सेना की मौजूदगी में बाकी पुलिसकर्मियों को छोड़ने के बदले संतोष भाभू को सौंपने की शर्त रखी। करीब ढाई बजे रात में उनकी बेरहमी से लिंचिंग कर दी गई।

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल

हबीगंज जिला मुस्लिम बहुल है, जहां हिंदू आबादी करीब 16 फीसदी है। इस घटना और हालिया वीडियो ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इस तरह की बयानबाजी और खुलेआम हिंसा पर गर्व, कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।