T20 WC: अभिषेक की खराब फॉर्म ने बढ़ाई चिंता, परेशानी का सबब बना तिलक का स्ट्राइक रेट; अब असली परीक्षा
टी20 विश्व कप के ग्रुप चरण में भारतीय टीम भले ही अजेय रही और उसने सभी चार मैच जीते, लेकिन अब तक उसका प्रदर्शन बहुत ज्यादा अच्छा नहीं रहा है।
अहमदाबाद/जनमत न्यूज़। टी20 विश्व कप के ग्रुप चरण में भारतीय टीम भले ही अजेय रही और उसने सभी चार मैच जीते, लेकिन अब तक उसका प्रदर्शन बहुत ज्यादा अच्छा नहीं रहा है। बल्लेबाजी हो या फील्डिंग दोनों ही मोर्चों पर टीम संघर्ष करती दिखी है।
वहीं, गेंदबाजी अपेक्षाकृत संतोषजनक रही है, लेकिन अब गत चैंपियन टीम की असली परीक्षा शुरू होगी। शनिवार से सुपर आठ चरण की शुरुआत हो रही है और भारत अगले दौर में अपना पहला मैच रविवार को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेलने उतरेगा।
लगातार तीन शून्य के बाद अभिषेक पर बढ़ा दबाव
न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में संजू सैमसन के नहीं चलने पर टीम प्रबंधन ने टी20 विश्व कप के लिए उनकी जगह ईशान किशन को अभिषेक शर्मा के जोड़ीदार के रूप में शामिल कर लिया, लेकिन उसने यह नहीं सोचा कि बाएं हाथ के बल्लेबाजों की ओपनिंग जोड़ी धीमे विकेटों पर स्पिनरों के खिलाफ गच्चा भी खा सकती है।
भारत के शीर्ष क्रम को धीमे विकेटों पर स्पिनरों के सामने संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसे में भारतीय टीम को दाएं और बाएं हाथ के बल्लेबाजों की ओपनिंग जोड़ी की कमी खल रही है। बाएं हाथ के ओपनरों की जोड़ी के खिलाफ अंगुली के स्पिनर असरदार रहे हैं।
समस्या सिर्फ बाएं हाथ के ओपनरों की नहीं है। नंबर तीन पर बल्लेबाजी करने आ रहे तिलक वर्मा भी बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं। अब तक विश्व कप में अभिषेक के साथ तिलक का भी प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा है।
कैसे बढ़ी भारत की चिंता
- अभिषेक ने जहां इस विश्वकप में अपना खाता भी नहीं खोला है। वहीं, तिलक ने चार मैचों में 120.45 स्ट्राइक रेट से 106 रन बनाए हैं।
- नंबर तीन पर यह स्ट्राइक रेट अच्छा नहीं है, जबकि उनका करियर स्ट्राइक रेट 141.8 का है।
- तिलक ने अब तक कोई अर्धशतक भी नहीं लगाया है। उन्हें शुरुआत अच्छी मिली है, लेकिन एक बार भी वह बड़ी पारी नहीं खेल पाए हैं।
- भारत को सुपर आठ में दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे की चुनौती मिलेगी। अगर इनके खिलाफ बेहतर करना है तो अभिषेक और तिलक को कुछ बड़ा करना होगा।
धीमी पिचों पर नहीं खेलना बना समस्या
भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में रनों का अंबार लगाया। समान उछाल और एक गति से आ रही गेंदों पर भारत ने 5 मैचों में 238, 209, 155 (10 ओवर में), 165 और 271 रन जैसे बड़े स्कोर बनाए।
इस सीरीज में बल्लेबाजों के प्रदर्शन ने विश्व कप में धूम-धड़ाके की उम्मीदें जगाईं, लेकिन विश्व कप के पहले मैच से ही सह मेजबान भारत को अपने घर में मनमाफिक पिचें नहीं मिलीं। ये पिचें धीमीं थीं जिन पर अभिषेक और तिलक वर्मा जैसे स्ट्रोक प्लेयर को दिक्कत आई।
अभिषेक तेजी से बल्ला घुमाते हैं और पिच पर रुककर आ रही गेंद पर वह अपने बल्ले की स्विंग से तालमेल नहीं बिठा पा रहे हैं। भारत ने अब तक इस विश्व कप में एक बार ही नामीबिया के खिलाफ 200 से अधिक का स्कोर किया है।
सुपर आठ में भी अगर धीमीं पिचें मिलीं तो यहां भारतीय बल्लेबाजों को उसी तरह से तालमेल बिठाना होगा जैसा ईशान किशन ने पाकिस्तान के खिलाफ 77 रन की पारी और सूर्यकुमार ने अमेरिका के खिलाफ 84 रन की पारी के दौरान दिखाया था।
गंभीर ने अभिषेक से की लंबी मंत्रणा
शुक्रवार को अभ्यास के दौरान निगाहें अभिषेक पर रहीं। अभिषेक ने कोच गौतम गंभीर से लंबी मंत्रणा की। गंभीर उन्हें कई गुर देते नजर आए। बाद में उन्होंने कैच का अभ्यास किया और स्पिन गेंदबाजी भी की।
गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल ने कहा कि अभिषेक को लेकर कोई खास चर्चा नहीं हुई है, लेकिन हम विश्व कप के अहम दौर से गुजर रहे हैं। हमें उनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। वह गेंद को अच्छी तरह हिट कर रहे हैं। उन्हें अच्छी शुरुआत की जरूरत है। उन्होंने धीमी पिचों पर कहा कि क्यूरेटर सर्वश्रेष्ठ पिचें देने की कोशिश कर रहे हैं।
एक खिलाड़ी के दम पर हुआ है बेड़ा पार
ग्रुप दौर में भारतीय टीम के लिए सकारात्मक पक्ष यह है कि उसकी गेंदबाजी शानदार रही है और चारों मैच में किसी एक खिलाड़ी ने अपने किरदार को बखूबी निभाया है।
अमेरिका के खिलाफ सूर्यकुमार चले, नामीबिया के खिलाफ ईशान और हार्दिक ने जिम्मेदारी संभाली, पाकिस्तान के खिलाफ ईशान ने यादगार पारी खेली और नीदरलैंड के खिलाफ शिवम दुबे ने नहीं भुलाने वाली पारी खेली।
यह प्रारूप ऐसा है जिसमें एक खिलाड़ी ने मोर्चा संभाल लिया तब भी काम बन जाता है, लेकिन सूर्यकुमार और गंभीर हमेशा सभी की भूमिका की वकालत करते रहे हैं।
सुपर आठ का मंच भी ऐसा है जहां एक नहीं हर खिलाड़ियों को मिलकर जिम्मेदारी उठानी होगी। अकेले मोर्चा संभालने में हमेशा जोखिम ज्यादा रहता है और भारत को चारों मैचों में खेल के किसी न किसी एक पक्ष में संघर्ष जरूर करना पड़ा।
भारत अब किसी तरह का जोखिम नहीं उठा सकता क्योंकि अब असली परीक्षा शुरू हुई है। सूर्यकुमार की अगुआई वाली टीम को अगर खिताब बरकरार रखना है तो ग्रुप चरण में की गई गलतियों से सीख लेना होगा।

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