उत्तराखंड की केदार घाटी में फिर लौटी आस्था व आजीविका की रौनक, टूटा सन्नाटा; पार्किंग अभी से फुल

देवभूमि उत्तराखंड में शीतकाल में बर्फ की सफेद चादर में छह महीने तक शांत पड़ी केदार घाटी एक बार फिर जीवंत हो उठी है।

उत्तराखंड की केदार घाटी में फिर लौटी आस्था व आजीविका की रौनक, टूटा सन्नाटा; पार्किंग अभी से फुल
Published By- Diwaker Mishra

रुद्रप्रयाग/जनमत न्यूज़। देवभूमि उत्तराखंड में शीतकाल में बर्फ की सफेद चादर में छह महीने तक शांत पड़ी केदार घाटी एक बार फिर जीवंत हो उठी है।

बाबा केदार के धाम के कपाट खुलते हीं पूरी घाटी में आस्था, उत्साह और आर्थिक गतिविधियों का संगम देखने को मिल रहा है। जहां कुछ दिन पहले तक सन्नाटा पसरा था, वहीं अब हर ओर हर-हर महादेवके जयघोष और यात्रियों की चहल-पहल गूंज रही है।

इससे पहले मंगलवार को डोली के शीतकालीन गद्दीस्थल से केदारपुरी पहुंचते ही घाटी का नजारा पूरी तरह बदल गया है। अगस्त्यमुनि से लेकर गुप्तकाशी, फाटा, सीतापुर, सोनप्रयाग और गौरीकुंड तक हाईवे किनारे दुकानें सजी हैं।

व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठानों को नया रूप दिया है और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार हैं। केवल केदारघाटी में ही पचास हजार से अधिक व्यापारी इस यात्रा से सीधे तौर पर जुड़े हैं, जो आने वाले छह महीनों में लाखों तीर्थयात्रियों की सेवा में जुटे रहेंगे।

पार्किंग स्थल वाहनों से अभी से फुल

केदारनाथ यात्रा मार्ग पर भी रौनक साफ झलकने लगी है। पैदल मार्ग पर छोटी-छोटी दुकानें यात्रियों के लिए चाय, नाश्ता और जरूरी सामान उपलब्ध करा रही हैं। सोनप्रयाग और गौरीकुंड की पार्किंग स्थल वाहनों से अभी से फुल हो गए हैं। बाजारों में दिनभर यात्रियों और स्थानीय लोगों की आवाजाही बनी हुई है।

यात्रा को सुरक्षित और सुचारु बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन भी पूरी तरह सक्रिय है। हर प्रमुख चौराहे और पड़ाव पर सुरक्षा बल तैनात हैं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। केदारनाथ यात्रा यहां के लोगों के लिए केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि जीवनयापन का मुख्य आधार भी है।

छह महीने चलने वाली यह यात्रा स्थानीय व्यापारियों, होटल व्यवसायियों, ढाबा संचालकों, घोड़ा-खच्चर मालिकों और छोटे दुकानदारों के लिए सालभर की आय का प्रमुख स्रोत है। इसी अवधि में होने वाली कमाई से वे अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं और पूरे वर्ष की आर्थिक जरूरतें पूरी करते हैं।

यात्रा के सुचारु संचालन में घोड़ा-खच्चरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जिले के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से भी इनका आगमन जारी है। सोनप्रयाग और गौरीकुंड में बड़ी संख्या में घोड़ा-खच्चर पहुंच चुके हैं।

इस बार लगभग 8 हजार घोड़ा-खच्चरों के यात्रा मार्ग पर तैनात होने का अनुमान है, जो बुजुर्गों और असमर्थ यात्रियों के लिए सहारा बनेंगे।

व्यापारियों को बेहतर सीजन की उम्मीद

स्थानीय व्यापारियों में इस बार यात्रा को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। होटल एसोसिएशन केदार घाटी के महासचिव मनोज सेमवाल के अनुसार, “हर साल की तरह इस बार भी सभी को यात्रा से बड़ी उम्मीदें हैं। यही समय होता है जब सभी लोग अपनी सालभर की आर्थिक स्थिति मजबूत करते हैं।

वहीं, गौरीकुंड के व्यापारी मायाराम गोस्वामी का कहना है कि यह यात्रा न केवल स्थानीय बल्कि अन्य जिलों के हजारों लोगों की आजीविका से जुड़ी है।

अगले छह महीने तक गूंजेगी घाटी

डोली के केदारपुरी पहुंचते ही केदार घाटी में धार्मिक उत्साह और आर्थिक गतिविधियां अपने चरम पर पहुंच गई हैं। अब आने वाले छह महीनों तक यह पूरी घाटी श्रद्धालुओं के जयघोष, दुकानों की रौनक और व्यापारिक गतिविधियों से गुलजार रहेगी।

प्रशासन और स्थानीय लोग मिलकर यात्रा को सफल और सुरक्षित बनाने में जुटे हुए हैं, ताकि हर श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर सुखद अनुभव लेकर लौट सके।

रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कहा केदारनाथ यात्रा को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। केदारनाथ पैदल मार्ग के साथ ही हाइवे पर व्यवस्था सुचारू कर दी गई है। यात्रा से जुडे अधिकारियों को व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।