महाराष्ट्र: अंबरनाथ में एकनाथ शिंदे के साथ 'खेला', बीजेपी-कांग्रेस ने मिलाया हाथ; गठबंधन से सब हैरान

महाराष्ट्र के स्थानीय नगर निगम चुनाव लगातार दिलचस्प मोड़ ले रहे हैं। पूरे देश में कांग्रेस के खिलाफ बिगुल फूंकने वाली बीजेपी ने ठाणे में उसी से हाथ मिला लिया है।

महाराष्ट्र: अंबरनाथ में एकनाथ शिंदे के साथ 'खेला', बीजेपी-कांग्रेस ने मिलाया हाथ; गठबंधन से सब हैरान
Published By- Diwaker Mishra

मुंबई/जनमत न्यूज़। महाराष्ट्र के स्थानीय नगर निगम चुनाव लगातार दिलचस्प मोड़ ले रहे हैं। पूरे देश में कांग्रेस के खिलाफ बिगुल फूंकने वाली बीजेपी ने ठाणे में उसी से हाथ मिला लिया है। हैरानी की बात तो ये है कि कांग्रेस और बीजेपी का गठबंधन एकनाथ शिंदे की शिवसेना के खिलाफ किया गया है।

मुंबई से महज 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ठाणे की अंबरनाथ नगर परिषद में कांग्रेस और बीजेपी एक-साथ आ गए हैं। इसके बाद राज्य का सियासी पारा भी आसमान छूने लगा है।

क्या है पूरा माजरा?

दरअसल, अंबरनाथ नगर परिषद को शिंदे की शिवसेना का गढ़ माना जाता है। डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे यहीं से ही सांसद हैं। अंबरनाथ सीट पर एक बार फिर शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत से चूक गई।

ऐसे में शिवसेना ने बीजेपी के साथ गठबंधन की योजना बनाई, मगर बीजेपी ने शिवसेना की बजाए कांग्रेस का हाथ थाम लिया। कांग्रेस और बीजेपी ने मिलकर यहां सरकार बनाई और बीजेपी पार्षद यहां से नगर अध्यक्ष चुने गए।

शिवसेना ने साधा निशाना

बीजेपी के इस फैसले से शिवसेना काफी नाराज है। शिंदे के विधायक डॉ. बालाजी किनिकर ने इस गठबंधन को 'अभद्र युति' करार दिया है। वहीं, श्रीकांत शिंदे ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी चुप्पी तोड़ी है।

श्रीकांत शिंदे के अनुसार, इस गठबंधन पर बीजेपी से सवाल पूछना चाहिए। बीजेपी नेता ही इसका जवाब दे पाएंगे। बीजेपी और शिवसेना कई सालों से केंद्र समेत राज्य में गठबंधन में है और ये गठबंधन अटूट रहना चाहिए। शिवसेना ने अंबरनाथ में अच्छा विकास कार्य किया है। शिवसेना विकास की राजनीति करने वालों का ही साथ देगी।

बीजेपी ने दिया जवाब

बीजेपी ने सभी सियासी सवालों पर सफाई पेश की है। बीजेपी के उपाध्यक्ष गुलाबराव करंजुले पाटिल ने कहा कि बीजेपी ने कई बार शिवसेना से गठबंधन पर बात करने की कोशिश की, लेकिन शिवसेना ने इसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। स्पष्ट जवाब न मिलने की स्थिति में बीजेपी ने यह कदम उठाया है।