कानपुर देहात: फायर सेफ्टी व्यवस्था की खुली पोल, बिना एनओसी चल रहा है जिला महिला अस्पताल

दिल्ली के होटल अग्निकांड और बिहार के अस्पताल में लगी भीषण आग जैसी घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर दिया। इन हादसों के बाद फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए.

कानपुर देहात: फायर सेफ्टी व्यवस्था की खुली पोल, बिना एनओसी चल रहा है जिला महिला अस्पताल
Published By- Diwaker Mishra

कानपुर देहात से अखिलेश त्रिवेदी की रिपोर्ट

कानपुर देहात/जनमत न्यूज़। दिल्ली के होटल अग्निकांड और बिहार के अस्पताल में लगी भीषण आग जैसी घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर दिया। इन हादसों के बाद फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन कानपुर देहात से जो तस्वीर सामने आई है, वह बेहद चिंताजनक है।

जिले के सबसे बड़े सरकारी महिला अस्पताल, 100 शैय्या जिला महिला एवं बाल चिकित्सालय अकबरपुर में अग्निशमन विभाग की जांच में गंभीर खामियां सामने आई हैं। अस्पताल अब तक बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहा है, जबकि यहां रोजाना सैकड़ों मरीज, गर्भवती महिलाएं, नवजात शिशु और उनके तीमारदार मौजूद रहते हैं।

कानपुर देहात के 100 शैय्या जिला महिला एवं बाल चिकित्सालय में मरीजों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्य अग्निशमन अधिकारी की ओर से स्वास्थ्य विभाग को जारी नोटिस में बताया गया है कि हाल ही में अस्पताल में हुई मॉक ड्रिल और निरीक्षण के दौरान कई फायर सुरक्षा व्यवस्थाएं ठप पाई गईं।

जांच में सामने आया कि अस्पताल में स्थापित कई अग्निशमन उपकरण बंद पड़े हुए हैं, कई व्यवस्थाएं मानकों के अनुरूप नहीं हैं और पूरी फायर सेफ्टी व्यवस्था प्रभावी रूप से काम नहीं कर रही है।

अग्निशमन विभाग का कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में आग लगने की स्थिति में तत्काल राहत और बचाव कार्य के लिए सभी उपकरणों का क्रियाशील होना अनिवार्य है, लेकिन निरीक्षण के दौरान कई कमियां सामने आईं।

इसी के चलते स्वास्थ्य विभाग को नोटिस जारी कर सभी खामियों को दूर करने, उपकरणों को चालू कराने और निर्धारित मानकों के अनुरूप व्यवस्थाएं स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि अग्निशमन विभाग की ओर से यह कोई पहला नोटिस नहीं बताया जा रहा।

सूत्रों के अनुसार पूर्व में भी कई बार अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को फायर सुरक्षा संबंधी कमियों को लेकर अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

नतीजा यह है कि वर्षों से महत्वपूर्ण सरकारी अस्पताल में फायर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो सकी और फायर एनओसी का मामला भी अधूरा बना हुआ है।

बड़ा सवाल यह है कि जिस अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी होती है, जहां नवजात शिशुओं का उपचार किया जाता है और जहां हर दिन सैकड़ों मरीज भर्ती रहते हैं, वहां यदि कोई आग जैसी आपात स्थिति पैदा हो जाए तो उससे निपटने की तैयारी कितनी है?

दिल्ली और बिहार जैसे दर्दनाक हादसों से सबक लेने की बात कही जाती है, लेकिन कानपुर देहात में सामने आई यह रिपोर्ट बताती है कि जमीनी स्तर पर अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों पर हैं कि आखिर कब तक इन कमियों को दूर किया जाएगा और कब इस अस्पताल को पूरी तरह सुरक्षित बनाकर आवश्यक फायर एनओसी प्राप्त की जाएगी। क्योंकि सवाल सिर्फ नियमों का नहीं, बल्कि उन सैकड़ों महिलाओं, बच्चों और मरीजों की जिंदगी का है जो हर दिन इस अस्पताल पर भरोसा करके यहां पहुंचते हैं।