बिहार में MLC चुनाव का बिगुल, 10 सीटों के लिए नामांकन आज से शुरू; क्या रोहिणी आचार्य लड़ेंगी चुनाव?
बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। रोहिणी आचार्य ने चुनाव लड़ने की खबरों का खंडन किया, जबकि एनडीए ने सभी सीटों पर जीत का दावा किया है।
पटना/जनमत न्यूज़: बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया सोमवार से औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। विधानसभा कोटे की 9 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव और एक सीट पर उपचुनाव को लेकर अधिसूचना जारी होने के साथ ही उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके साथ ही राज्य की राजनीति में चुनावी हलचल तेज हो गई है।
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, उम्मीदवार 8 जून तक नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। 9 जून को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी, जबकि 11 जून नाम वापस लेने की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। आवश्यकता पड़ने पर 18 जून को मतदान कराया जाएगा और उसी दिन मतगणना के बाद परिणाम भी घोषित कर दिए जाएंगे।
रोहिणी आचार्य ने चुनाव लड़ने की अटकलों को बताया अफवाह
चुनावी चर्चाओं के बीच राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में लिया जा रहा था। हालांकि रोहिणी ने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके विधान परिषद चुनाव लड़ने की खबरें पूरी तरह निराधार हैं।
रोहिणी ने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन ऐसी अफवाहों से उनकी छवि प्रभावित नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले उनके परिवार को लेकर भी कई तरह की भ्रामक खबरें फैलाई जा चुकी हैं।
एनडीए ने सभी सीटों पर जीत का किया दावा
वहीं, एनडीए ने विधान परिषद चुनाव को लेकर जीत का दावा किया है। जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि गठबंधन सभी 10 सीटों पर शानदार प्रदर्शन करेगा। उन्होंने दावा किया कि राज्यसभा चुनावों की तरह विधान परिषद चुनाव में भी एनडीए को व्यापक समर्थन मिलेगा।
उम्मीदवारों के चयन को लेकर पटना में लगातार बैठकों का दौर जारी है। जदयू के वरिष्ठ नेताओं और गठबंधन सहयोगियों के बीच सीटों और प्रत्याशियों को लेकर मंथन जारी है। राजनीतिक दलों की ओर से जल्द ही उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा किए जाने की संभावना है।
बिहार विधान परिषद की इन सीटों के चुनाव को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों की ताकत और रणनीति की परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है।

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