एसएम नेट समन्वयकों ने उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक को सौंपा ज्ञापन, सेवा बहाली एवं पुनर्नियोजन की मांग तेज

प्रतिनिधिमंडल की ओर से प्रस्तुत मांगों को गंभीरता से लेते हुए उपमुख्यमंत्री श्री बृजेश पाठक ने संबंधित अधिकारियों को प्रकरण पर त्वरित एवं आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

एसएम नेट समन्वयकों ने उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक को सौंपा ज्ञापन, सेवा बहाली एवं पुनर्नियोजन की मांग तेज
PUBLISHED BY MANOJ KUMAR

लखनऊ से शैलेन्द्र शर्मा की रिपोर्ट —

लखनऊ/जनमत न्यूज। सोशल मोबिलाइजेशन नेटवर्क (एसएम नेट) उत्तर प्रदेश के समन्वयकों एवं कर्मचारियों की सेवा बहाली की मांग को लेकर आंदोलन अब और तेज हो गया है। इसी क्रम में एसएम नेट के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री बृजेश पाठक से मुलाकात कर उन्हें विस्तृत ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने एसएम नेट के पुनर्संचालन, कर्मचारियों के पुनर्नियोजन तथा उनके भविष्य को सुरक्षित किए जाने की मांग उठाई।

प्रतिनिधिमंडल की ओर से प्रस्तुत मांगों को गंभीरता से लेते हुए उपमुख्यमंत्री श्री बृजेश पाठक ने संबंधित अधिकारियों को प्रकरण पर त्वरित एवं आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस दौरान कर्मचारियों ने उन्हें एसएम नेट से जुड़े कर्मचारियों की वर्तमान स्थिति एवं उनके समक्ष उत्पन्न रोजगार संकट से भी अवगत कराया।

गौरतलब है कि एक दिन पूर्व लखनऊ स्थित इको गार्डन में सोशल मोबिलाइजेशन नेटवर्क के तत्वावधान में प्रदेशभर के समन्वयकों एवं बीएमसी साथियों द्वारा विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया था। धरने में बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने भाग लेते हुए अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की थी। कर्मचारियों का कहना था कि उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने और जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों को जन-जन तक पहुंचाने में एसएम नेट की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।

वक्ताओं ने बताया कि वर्ष 2001 में यूनिसेफ द्वारा स्थापित सोशल मोबिलाइजेशन नेटवर्क ने प्रदेश में पोलियो उन्मूलन अभियान को सफल बनाने में ऐतिहासिक योगदान दिया। इसके अलावा दस्तक अभियान, संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम, कोविड-19 प्रबंधन, नियमित टीकाकरण, मिशन इंद्रधनुष, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, दस्त नियंत्रण पखवाड़ा, पोषण कार्यक्रम, ग्रामीण स्वास्थ्य एवं स्वच्छता अभियान तथा विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रमों में भी एसएम नेट के समन्वयकों ने जमीनी स्तर पर उल्लेखनीय कार्य किया।

कर्मचारियों ने बताया कि 31 मार्च 2026 को यूनिसेफ द्वारा एसएम नेट को बंद किए जाने के निर्णय के बाद प्रदेश के लगभग 555 कर्मचारियों और उनके परिवारों के समक्ष आजीविका का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने कहा कि वर्षों से स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर कार्य करने वाले इन कर्मचारियों का भविष्य आज अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है।

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा फरवरी 2026 में एसएम नेट के संचालन के लिए विशेष बजट का प्रावधान किए जाने की जानकारी मिली थी। इसके बावजूद अब तक नेटवर्क के पुनर्संचालन अथवा कर्मचारियों के पुनर्नियोजन को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। कर्मचारियों का आरोप है कि विभागीय स्तर पर निर्णय लेने में हो रही देरी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जटिलता के कारण समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।

कर्मचारियों ने कहा कि इससे पूर्व भी वे मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य), स्वास्थ्य महानिदेशक सहित विभिन्न जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को कई बार ज्ञापन सौंप चुके हैं। अप्रैल माह में भी इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन एवं वार्ता हुई थी, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं किया गया। इसी कारण कर्मचारियों ने पुनः अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाते हुए उपमुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री को बताया कि एसएम नेट से जुड़े कर्मचारी वर्षों से स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन में सेतु की भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में उनके अनुभव और सेवाओं का उपयोग जनहित में किया जाना चाहिए तथा उन्हें पुनः स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जोड़ा जाना चाहिए।

उपमुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद कर्मचारियों ने आशा व्यक्त की कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो प्रदेशभर के प्रभावित कर्मचारी अपने लोकतांत्रिक आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए बाध्य होंगे।

ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में डॉ. राजेश सिंह, योगेश सिंह, हर्षित राज, ज्ञानेन्द्र कुमार सहित अन्य पदाधिकारी एवं कर्मचारी प्रतिनिधि शामिल रहे।