पायलट भर्ती के लिए इंडिगो व एयर इंडिया में होड़, बोनस के बाद भी नहीं रुक रहे हैं कैप्टन
फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों से उपजे इंडिगो संकट के बाद एविएशन इंडस्ट्री में अनुभवी पायलट की जरूरत बढ़ गई है और इसे लेकर इंडिगो और एयर इंडिया में होड़ शुरू हो गई है।
नई दिल्ली/जनमत न्यूज़। फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों से उपजे इंडिगो संकट के बाद एविएशन इंडस्ट्री में अनुभवी पायलट की जरूरत बढ़ गई है और इसे लेकर इंडिगो और एयर इंडिया में होड़ शुरू हो गई है।
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सख़्त सिक्योरिटी नियमों के कारण पायलटों की उपलब्धता में काफ़ी कमी आई है, जिससे इंडिगो और एयर इंडिया ग्रुप के बीच भर्ती और कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए ज़बरदस्त होड़ शुरू हो गई है।
उधर, इंडिगो ने डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) को विश्वास दिलाया है कि वह इस तरह की गड़बड़ी दोबारा न हो, इसके लिए कर्मचारियों की हायरिंग को काफी बढ़ाएगी। इसके तहत जनवरी में ही लगभग 100 पायलटों को भर्ती करने का प्लान है।
एयर इंडिया ने भी निकाली वैकेंसी
वहीं, एयर इंडिया ने भी बेहतर फ्लाइट ऑपरेशन के लिए अपने कॉकपिट रैंक को मज़बूत करने के लिए भर्ती के विज्ञापन निकाले हैं। हालांकि, चुनौती नई हायरिंग से नहीं बल्कि कैप्टन के इस्तीफों से है।
दरअसल, दोनों एयरलाइंस कैप्टन के लगातार इस्तीफ़ों से जूझ रही हैं, जिसमें पायलट घरेलू एयरलाइन कंपनियों के बीच स्विच कर रहे हैं या विदेशी एयरलाइंस के लिए भारत छोड़कर जा रहे हैं।
कैप्टन को रोकना बड़ी चुनौती
ऐसे में नई हायरिंग के साथ-साथ मौजूदा पायलट को बनाए रखने के लिए भी ये कंपनीज़ फोकस कर रही हैं, इसलिए दोनों एयरलाइन अपने पायलटों को आकर्षक ऑफर दे रही हैं। दो बड़ी एयरलाइंस में से एक कंपनी के सीनियर अधिकारी ने बताया कि कैप्टन को पहले से ही बिना मांगे कॉल आ रहे हैं, जिनमें 50 लाख रुपये तक का जॉइनिंग बोनस ऑफर किया जा रहा है।
अधिकारी ने कहा, "हम कैप्टन कहाँ से लाएँगे? नए FDTL नियमों के तहत, अनुभवी पायलटों की कमी और भी गंभीर हो जाएगी। दूसरे एयरलाइंस के पायलटों को तोड़ने का काम और तेज़ होगा।"
यह पहली बार नहीं हुआ है, एक सीनियर पायलट के अनुसार, इंडिगो ने पहले भी अनुभवी पायलटों को उनके पुराने एम्प्लॉयर्स को दिए जाने वाले बॉन्ड पेमेंट की भरपाई के लिए जॉइनिंग बोनस दिया था। ये इंसेंटिव उस समय 15 लाख रुपये से 25 लाख रुपये तक थे, जब बॉन्ड की रकम आमतौर पर 5 लाख रुपये से 15 लाख रुपये के बीच होती थी।

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