सर्व शिक्षा अभियान की हजारों पुस्तकें रद्दी में बेची गईं, डीएम अक्षय त्रिपाठी का बड़ा एक्शन

जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि किताबों को नियमों के विरुद्ध रद्दी में बेच दिया गया। इस खुलासे के बाद शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है।

सर्व शिक्षा अभियान की हजारों पुस्तकें रद्दी में बेची गईं, डीएम अक्षय त्रिपाठी का बड़ा एक्शन
PUBLISHED BY - MANOJ KUMAR

 बहराइच से रिजवान खान की रिपोर्ट —

बहराइच/जनमत न्यूज। जिले में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए भेजी गई हजारों किताबें कबाड़ी की दुकान पर रद्दी के रूप में बेचे जाने का खुलासा हुआ है। स्टॉक मिलान के दौरान 13,595 किताबें रिकॉर्ड से गायब पाई गईं, जिसके बाद जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है।

जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि किताबों को नियमों के विरुद्ध रद्दी में बेच दिया गया। इस खुलासे के बाद शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है।

चार कर्मचारियों पर कार्रवाई, बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू

प्रकरण में त्वरित कार्रवाई करते हुए अनुचर शफीक अहमद और आलोक कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं डीसी कम्युनिटी आशुतोष सिंह और अनुदेशक अतुल कुमार सिंह के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।

इसके अतिरिक्त बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) स्तर पर भी लापरवाही की जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार जांच का दायरा और बढ़ सकता है तथा आगे और भी अधिकारियों या कर्मचारियों पर कार्रवाई संभव है।

बच्चों के भविष्य से खिलवाड़

सरकारी योजनाओं के तहत वितरित की जाने वाली किताबें विद्यार्थियों के शैक्षिक विकास का आधार होती हैं। ऐसे में उनका रद्दी में बेचा जाना न केवल वित्तीय अनियमितता का मामला है, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ भी है।

यह घटना शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।

फिलहाल चार कर्मचारियों पर कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन जांच पूरी होने के बाद और नाम सामने आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। जिला प्रशासन की इस सख्ती को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।