मुज़फ्फरनगर में सरकारी तंत्र की गुंडागर्दी! बाबू पर महिला को धमकाने का आरोप, शिकायत वापस लेने का दबाव
उप्र के जनपद मुज़फ्फरनगर में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाना अब आम नागरिक, खासकर महिलाओं के लिए खतरे से खाली नहीं रह गया है।
मुज़फ्फरनगर से संजय कुमार की रिपोर्ट
मुज़फ्फरनगर/जनमत न्यूज़। उप्र के जनपद मुज़फ्फरनगर में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाना अब आम नागरिक, खासकर महिलाओं के लिए खतरे से खाली नहीं रह गया है।
मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां वरिष्ठ सहायक सतीश कुमार (PRD बाबू) पर एक महिला शिकायतकर्ता को शिकायत वापस लेने के लिए धमकाने, दबाव बनाने और गाली-गलौज करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
पीड़िता के अनुसार 13 जनवरी को उसने ब्लॉक स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर लिखित शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन जांच शुरू होने के बजाय, आरोपी सतीश कुमार लगातार शिकायतकर्ता पर दबाव बनाता रहा कि वह अपनी शिकायत वापस ले ले, नहीं तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
पीड़िता का आरोप है कि सतीश कुमार ने साफ शब्दों में कहा- “तुझे कहीं का नहीं छोड़ेंगे, अगर विभाग में रहना है तो शिकायत भूल जा”
इतना ही नहीं, महिला का दावा है कि महिला सशक्तिकरण और युवा कल्याण विभाग से जुड़ी अन्य शिकायतों में भी यही अधिकारी बार-बार हस्तक्षेप करता रहा है और भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण दे रहा है। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि उसे ऑडियो रिकॉर्डिंग के जरिए डराने-धमकाने की कोशिश की गई, ताकि वह चुप बैठ जाए।
सबसे गंभीर और चौंकाने वाली बात यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे साफ संकेत मिलता है कि भ्रष्ट तंत्र एक-दूसरे को बचाने में जुटा है और शिकायतकर्ताओं को जानबूझकर हताश किया जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल-
- क्या मुज़फ्फरनगर में शिकायत करना अपराध बन चुका है?
- क्या महिला शिकायतकर्ताओं को डराकर चुप कराना ही प्रशासन की नीति है?
- क्या भ्रष्ट अधिकारियों को खुली छूट देकर ईमानदार आवाज़ों का गला घोंटा जा रहा है?
पीड़िता ने मुख्य विकास अधिकारी से मांग की है कि आरोपी वरिष्ठ सहायक सतीश कुमार को तत्काल पद से हटाया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, अन्यथा वह इस प्रकरण को प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने को मजबूर होगी।

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