नवरात्र के नवें दिन विंध्याचल धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, माँ सिद्धिदात्री के दर्शन को लगी लंबी कतारें
भक्तों ने माँ विंध्यवासिनी के दरबार में माथा टेककर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की। धार्मिक मान्यता के अनुसार माँ सिद्धिदात्री को देवी दुर्गा का पूर्ण स्वरूप माना जाता है।
मिर्जापुर से आनंद तिवारी की रिपोर्ट —
मीरजापुर/जनमत न्यूज। चैत्र नवरात्र के नवें और अंतिम दिन जनपद Mirzapur स्थित विश्वप्रसिद्ध Vindhyachal Dham में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। नवरात्र की नवमी तिथि पर आदिशक्ति के नवम स्वरूप Maa Siddhidatri की पूजा-अर्चना के लिए देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। तड़के भोर से ही भक्तों की लंबी कतारें मंदिर परिसर में लग गईं और “जय माता दी” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
भक्तों ने माँ विंध्यवासिनी के दरबार में माथा टेककर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की। धार्मिक मान्यता के अनुसार माँ सिद्धिदात्री को देवी दुर्गा का पूर्ण स्वरूप माना जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने भगवान शिव को अष्ट सिद्धियां प्रदान की थीं, जिसके बाद शिव का आधा शरीर देवी का हो गया और वे अर्धनारीश्वर के रूप में पूजे जाने लगे।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार माँ सिद्धिदात्री कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं और उनकी चार भुजाएं होती हैं, जिनमें चक्र, गदा, शंख और कमल सुशोभित होते हैं। नवरात्र के नवें दिन विधि-विधान से माँ की पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है। इस अवसर पर कन्या पूजन और हवन-पूजन का भी आयोजन किया जाता है। श्रद्धालु कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजन करते हैं और उन्हें भोजन तथा उपहार देकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
विंध्य क्षेत्र के मंदिरों में नवमी के अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। वैदिक मंत्रोच्चार, दुर्गा सप्तशती का पाठ और भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से माँ की आराधना करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर हो जाती हैं।
इस दौरान विभिन्न प्रदेशों से आए श्रद्धालुओं ने भी माँ के दर्शन कर अपने अनुभव साझा किए और कहा कि भारी भीड़ के बावजूद उन्हें सुगम दर्शन का अवसर मिला, जिससे वे अत्यंत प्रसन्न हैं। भक्त परिवार सहित माँ के दरबार में पहुंचकर आशीर्वाद प्राप्त कर स्वयं को धन्य महसूस कर रहे हैं।
धार्मिक मान्यता है कि माँ सिद्धिदात्री की कृपा से साधक को आध्यात्मिक शक्तियों की प्राप्ति होती है और वह मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर होता है। नवरात्र के नौ दिनों तक चली माँ शक्ति की आराधना नवमी के साथ पूर्ण होती है और भक्त अगले वर्ष फिर इसी आस्था के साथ माँ के आगमन की प्रतीक्षा करते हैं।


