US-ईरान शांति वार्ता: शहबाज से मिला ईरानी प्रतिनिधिमंडल, तेहरान ने बातचीत के लिए रखी अहम शर्त

अमेरिका और ईरान के बीच सीधे संवाद की संभावना एक बार फिर उभर आई है, हालांकि वर्तमान में प्रत्यक्ष वार्ताएं रुकी हुई हैं।

US-ईरान शांति वार्ता: शहबाज से मिला ईरानी प्रतिनिधिमंडल, तेहरान ने बातचीत के लिए रखी अहम शर्त
Published By- Diwaker Mishra

इस्लामाबाद/जनमत न्यूज़। अमेरिका और ईरान के बीच सीधे संवाद की संभावना एक बार फिर उभर आई है, हालांकि वर्तमान में प्रत्यक्ष वार्ताएं रुकी हुई हैं। दोनों देश अप्रत्यक्ष माध्यमों से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें पाकिस्तान एक प्रमुख मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। यह स्थिति एक ऐसे समय में आई है जब दोनों देशों के बीच तनाव और अविश्वास गहरा बना हुआ है।

वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में इस्लामाबाद का दौरा किया, जहां उन्होंने पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर से मुलाकात की। इस बैठक में द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीतिक प्रयासों पर चर्चा हुई। पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहा है।

दोनों देशों की प्रत्यक्ष वार्ता में क्या हैं बाधाएं?

ईरान ने अमेरिका के साथ वार्ता से इनकार कर दिया है जब तक कि अमेरिकी नाकाबंदी समाप्त नहीं हो जाती। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि ईरान और अमेरिका के बीच किसी सीधी बैठक की योजना नहीं है, और ईरान के अवलोकन पाकिस्तान को बताए जाएंगे। इसके बजाय, दोनों पक्ष पाकिस्तानी मध्यस्थों के माध्यम से संवाद कर सकते हैं।

ईरान-अमेरिका के बीच तनाव का कारण

हाल के महीनों में, ईरान और अमेरिका के संबंध अपने सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गए हैं। अमेरिका ने ईरान की ओर नौसैनिक बेड़ा भेजा है, जबकि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है और अमेरिकी बंदरगाहों को अवरुद्ध कर दिया है। तनाव के माहौल में, दोनों पक्षों द्वारा जहाजों को जब्त करने की घटनाएं भी हुई हैं।

मध्यस्थता की भूमिका में पाकिस्तान

पाकिस्तान के अलावा, ओमान और रूस भी ईरान-अमेरिका संबंधों को सामान्य बनाने में भूमिका निभा रहे हैं। अतीत में, ओमान ने जिनेवा में दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष वार्ताओं में मध्यस्थ के रूप में कार्य किया है।

ईरान में आंतरिक विभाजन और भविष्य की राह

ईरान के भीतर राजनीतिक विभाजन, विशेष रूप से उदारवादियों और कट्टरपंथियों के बीच, वार्ता की प्रक्रिया को जटिल बना रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान की आंतरिक स्थिति को वार्ता में एक कारक बताया है, और उन्होंने दो सप्ताह के संघर्ष विराम की घोषणा को अनिश्चितकाल तक बढ़ा दिया है, भले ही तेहरान ने वार्ता फिर से शुरू नहीं की हो।