उरई: मुख्यमंत्री के मंत्रालय में भी खनन माफिया की बदनीयती, यमुना नदी में मानक के विपरीत होता खनन

देश की दूसरी सबसे बड़ी यमुना नदी को एक ओर जहां उसको बचाने के लिए परमार्थ समाजसेवी संस्था द्वारा बचाने के लिए यात्रा निकाली जा रही है वहीं दूसरी ओर खनन माफियाओं के हाथों उसे मिटाने के लिए मुहिम छेड़ी जा रही है। 

उरई: मुख्यमंत्री के मंत्रालय में भी खनन माफिया की बदनीयती, यमुना नदी में मानक के विपरीत होता खनन
Published By- Diwaker Mishra

उरई से सुनील शर्मा की रिपोर्ट

उरई/जनमत न्यूज़। देश की दूसरी सबसे बड़ी यमुना नदी को एक ओर जहां उसको बचाने के लिए परमार्थ समाजसेवी संस्था द्वारा बचाने के लिए यात्रा निकाली जा रही है वहीं दूसरी ओर खनन माफियाओं के हाथों उसे मिटाने के लिए मुहिम छेड़ी जा रही है। 

खनन विभाग ने नदी की सिल्ट सफाई के लिए निविदा निकाली थी, जिसमें रवि पंजवानी और वैभव गुप्ता को हीरापुर खंड संख्या 3 एवं 2 की निविदा मिली। इन दोनों ने मिलकर सफेद मौरंग की सिल्ट हटाने के नाम पर नदी के सुंदर रूप को बिगाड़ने का काम शुरू किया।

उसमें खनन परिवहन के लिए जो रास्ता बनाया उसमें भी एक ऐसी दीवार को क्षति पहुंचाई गई जिससे कालपी में गेस्ट हाउस के साथ साथ कई ऐतिहासिक मंदिर गिरने से बचा रही है यह दीवार को 45 करोड़ की लागत से बनाया गया है।

खनन ठेकेदारों द्वारा खनन परिवहन के लिए दीवार को क्षति पहुंचाकर ऐतिहासिक इमारतों को गिराने का मन बना लिया है। इसके अलावा यमुना संरक्षित नदी है इसमें भारी मशीनों को सरकार ने  प्रतिबंधित किया है। नदी से खनन के लिए इनसे खनन किया जा रहा है।

खनन मंत्रालय मुख्यमंत्री ने स्वयं इसलिए अपने पास रखा है, जिससे कोई गलत तरीके से कोई कार्य न हो सके लेकिन माफिया उनके आदेश को भी मानने के लिए तैयार नहीं है। पिछली सरकारों ने खनन में सरकार के नियमों की धज्जियां उड़ाई जिससे सरकार को काफी बेइज्जती का सामना करना पड़ा।

इसलिए मुख्यमंत्री ने इस विभाग को अपने पास रखा है कि पिछली सरकारों जैसा कार्य न हो। खनन ठेकेदारों द्वारा सरकार और विभाग के सारे नियमों को ताक पर रखकर खुला खेला जा रहा है।

जिला खनन अधिकारी शनि कौशल  से उनके सीयूजी नंबर पर 10,.47 सुबह बात करनी चाही लेकिन उनका मोबाइल उठा नहीं। हालांकि पिछले कई दिनों से जो प्रशासन की कार्रवाई हो रही है उससे साफ है कि किसी प्रकार से नियम विरुद्ध खनन नहीं होने दिया जा रहा है। लगातार ओवरलोडिंग पर सघन चेकिंग अभियान चलाकर सैकड़ों ट्रकों का चालान किया गया।