कुशीनगर के कुबेरस्थान में पुलिस और ग्रामीणों में टकराव, सड़क हादसे के बाद शुरू हुआ विवाद

उप्र के कुशीनगर जनपद के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र का जंगल पचरुखिया गांव इन दिनों सुर्खियों में है। एक सड़क हादसे के बाद शुरू हुआ विवाद अब पुलिस और ग्रामीणों के टकराव तक पहुंच गया है।

कुशीनगर के कुबेरस्थान में पुलिस और ग्रामीणों में टकराव, सड़क हादसे के बाद शुरू हुआ विवाद
Published By- Diwaker Mishra

कुशीनगर से प्रदीप यादव की रिपोर्ट

कुशीनगर/जनमत न्यूज़। उप्र के कुशीनगर जनपद के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र का जंगल पचरुखिया गांव इन दिनों सुर्खियों में है। एक सड़क हादसे के बाद शुरू हुआ विवाद अब पुलिस और ग्रामीणों के टकराव तक पहुंच गया है। मामले में दो वीडियो सामने आए हैं, जिनके आधार पर ग्रामीण पुलिस पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।

मामला 22 मई का है, ग्रामीणों के मुताबिक मोरंग लदे एक ट्रक ने सड़क किनारे खड़े संदीप मद्धेशिया को कुचल दिया था। गंभीर रूप से घायल संदीप का इलाज गोरखपुर में चल रहा था, जहां 1 जून को उसकी मौत हो गई।

हादसे के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने ट्रक को रोक लिया और उस पर पथराव कर दिया। बाद में पुलिस ट्रक को अपने कब्जे में लेकर चली गई। अब इस पूरे मामले में दो वीडियो सामने आए हैं।

पहले वीडियो में गांव पहुंचे पुलिसकर्मियों और कुछ ग्रामीणों के बीच कहासुनी और खींचतान होती दिखाई दे रही है। वीडियो में मौजूद लोग पुलिस पर महिलाओं से बदसलूकी और अभद्र भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगाते सुनाई दे रहे हैं।

दूसरा वीडियो और भी कई सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि यह वही ट्रक है जो हादसे के बाद पुलिस अभिरक्षा में था। वीडियो में ट्रैक्टर-ट्रॉली के जरिए ट्रक से मोरंग उतारते कुछ लोग दिखाई दे रहे हैं।

आरोप है कि बाद में इस मोरंग को निजी स्तर पर बेच दिया गया। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने इस मामले में दो ग्रामीणों को धारा 151 में जेल भेज दिया जिसके बाद ग्रामीणों ने नाराजगी जताई।

ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस गांव पहुंचकर लोगों को हिरासत में लेने लगी, जिसके बाद विरोध बढ़ गया और मामला हाथापाई तक पहुंच गया। वायरल वीडियो को भी इसी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।

इस मामले को लेकर कुबेरस्थान थानाध्यक्ष हर्षवर्धन सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुए विवाद की पुष्टि की,लेकिन जब्त ट्रक से मोरंग उतरवाने के आरोपों की जानकारी होने से इनकार किया।

पूरे प्रकरण में उठ रहे हैं कई सवाल

यदि ट्रक पुलिस की अभिरक्षा में था तो उससे मोरंग किसके आदेश पर उतरवाई गई? क्या जब्त वाहन और उसमें लदे सामान का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार किया गया था? पथराव के मामले में कार्रवाई की दिशा क्या रही और आखिर पुलिस व ग्रामीणों के बीच हालात मारपीट तक क्यों पहुंचे?

फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ पाएंगे। लेकिन वायरल वीडियो और ग्रामीणों के आरोपों ने पुलिस कार्रवाई को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।