काला कोट बनाम सफेद कोट विवाद गहराया, वकीलों ने आंदोलन की दी चेतावनी

अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा। अब सबकी नजर पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

काला कोट बनाम सफेद कोट विवाद गहराया, वकीलों ने आंदोलन की दी चेतावनी
PUBLISHED BY MANOJ KUMAR

शाहजहांपुर से राजीव शुक्ला की रिपोर्ट —

शाहजहांपुर/जनमत न्यूज। शाहजहांपुर में अधिवक्ता और चिकित्सक के बीच शुरू हुआ विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। महिला अधिवक्ता कुमकुम शुक्ला और डॉक्टर दीपिका अग्रवाल के बीच का मामला अब “काला कोट बनाम सफेद कोट” विवाद के रूप में चर्चा का विषय बन गया है। इस प्रकरण को लेकर अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश देखा जा रहा है और बार एसोसिएशन ने आंदोलन की चेतावनी दी है।

जानकारी के अनुसार 13 मई को डॉक्टर दीपिका अग्रवाल ने कोतवाली चौक में महिला अधिवक्ता कुमकुम शुक्ला के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। आरोप है कि यह मुकदमा फर्जी और मनगढ़ंत तथ्यों के आधार पर दर्ज कराया गया। वहीं अधिवक्ता पक्ष का कहना है कि 8 मई को डॉक्टर दीपिका अग्रवाल ने महिला अधिवक्ता के गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया था, लेकिन अधिवक्ता ने कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की क्योंकि वह डॉक्टर दीपिका अग्रवाल के पति डॉक्टर कुमार नितीश की अधिवक्ता हैं और विवाद से बचना चाहती थीं।

आरोप है कि इसके बावजूद डॉक्टर दीपिका अग्रवाल ने महिला अधिवक्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। इतना ही नहीं, 17 मई को कथित तौर पर दो अज्ञात लोगों को अधिवक्ता के घर भेजकर धमकी भी दिलाई गई। इसके बाद महिला अधिवक्ता ने 18 मई को सदर बाजार थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की।

बताया जा रहा है कि मामले की जांच उपनिरीक्षक प्रियव्रत शुक्ला द्वारा की गई, जिसमें घटना सही पाई गई। थाना प्रभारी द्वारा एफआईआर दर्ज करने का आश्वासन भी दिया गया, लेकिन 48 घंटे बीत जाने के बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। इसे लेकर अधिवक्ताओं में नाराजगी बढ़ गई है।

मामले को गंभीरता से लेते हुए सेंट्रल बार एसोसिएशन शाहजहांपुर के महामंत्री राजेश अवस्थी ने तत्काल संज्ञान लिया। बार पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं ने जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर महिला अधिवक्ता पर दर्ज एफआईआर निरस्त करने तथा डॉक्टर दीपिका अग्रवाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा। अब सबकी नजर पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।