अवैध खनन माफियाओं का आतंक, पहले सिपाही को कुचला अब किसान की गई जान

अवैध खनन से जुड़े विवाद में एक किसान की जान चली गई। घटना के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है।

अवैध खनन माफियाओं का आतंक, पहले सिपाही को कुचला अब किसान की गई जान
PUBLISHED BY MANOJ KUMAR

संभल से रामब्रेस यादव की रिपोर्ट —

संभल/जनमत न्यूज। संभल जनपद में अवैध खनन कारोबारियों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं। हालात ऐसे बन चुके हैं कि कभी पुलिसकर्मियों पर वाहन चढ़ाए जा रहे हैं तो कभी विरोध करने वाले ग्रामीण और किसान उनकी कार्रवाई का शिकार बन रहे हैं। ताजा मामला जुनावई थाना क्षेत्र के गांव अहरौला नवाजी का है, जहां अवैध खनन से जुड़े विवाद में एक किसान की जान चली गई। घटना के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है।

बताया जा रहा है कि अवैध खनन को लेकर पहले भी कई बार विवाद सामने आ चुके हैं। भाजपा के पूर्व विधायक अजीत यादव तथा वर्तमान सपा विधायक राम खिलाड़ी यादव भी खनन कारोबारियों के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। किसान संगठनों द्वारा भी कई बार विरोध प्रदर्शन और महापंचायत आयोजित की गई, लेकिन इसके बावजूद अवैध खनन का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है।

जानकारी के अनुसार 12 मई को धनारी थाना क्षेत्र के गांव बहिपुर में अवैध खनन रोकने पहुंची पुलिस टीम पर खनन माफियाओं ने वाहन चढ़ा दिया था, जिसमें एक सिपाही गंभीर रूप से घायल हो गया था। इस मामले में एक दरोगा, सिपाही और लेखपाल को निलंबित किया गया था तथा सात लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी।

इसके अलावा अहरौला नवाजी गांव में खनन का विरोध करने पर किसान संगठनों और खनन कारोबारियों के बीच पहले भी टकराव हो चुका है। उस दौरान किसान संगठन से जुड़े करीब 60 किसानों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। आरोप है कि खनन माफियाओं के रसूख के चलते प्रशासनिक कार्रवाई प्रभावी नहीं हो पा रही है।

सूत्रों के मुताबिक 18 मई को पुलिस चौकी के पास अवैध खनन में लगे वाहनों को पकड़ा गया था, जिसके बाद मझोला चौकी के चार पुलिसकर्मियों को भी निलंबित किया गया। लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद संभल पुलिस अब अवैध खनन कारोबारियों और उनसे मिलीभगत रखने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई में जुटी हुई है।

फिलहाल क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है और लोग प्रशासन से अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन की कार्रवाई अवैध खनन माफियाओं पर कितनी प्रभावी साबित होती है।