बांदा से आशीष सागर दीक्षित की रिपोर्ट —
बाँदा/जनमत न्यूज। सीमित संसाधनों के बावजूद बेहतर चिकित्सा सेवा का उदाहरण पेश करते हुए रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज बाँदा के नाक, कान, गला एवं कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र सिंह ने एक जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। इस सर्जरी के बाद 17 वर्षीय युवक उत्तम को बड़ी राहत मिली है, जो लंबे समय से गंभीर समस्या से जूझ रहा था।
जानकारी के अनुसार, सिमौनी निवासी 17 वर्षीय उत्तम पुत्र चुनुबाद को बचपन से ही नाक संबंधी समस्या थी। उसे अक्सर जुकाम रहता था और दवा लेने पर अस्थायी राहत मिलती थी। लेकिन पिछले छह महीनों से स्थिति अधिक गंभीर हो गई। जुकाम के साथ नाक से खून आना शुरू हो गया और सांस लेने में भी कठिनाई होने लगी।
परिजन उसे बांदा के कई चिकित्सकों के पास ले गए, लेकिन राहत न मिलने पर लखनऊ ले जाया गया। वहां जांच में पता चला कि युवक की नाक के अंदर नस में 3×3 सेंटीमीटर का ट्यूमर (जेएनए) है। ट्यूमर की जटिल स्थिति को देखते हुए लखनऊ के डॉक्टरों ने ऑपरेशन से मना कर दिया और मरीज को हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवार उच्च स्तरीय निजी अस्पताल का खर्च उठाने में असमर्थ था, जिसके बाद वे वापस बांदा लौट आए और रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में ईएनटी सर्जन डॉ. भूपेंद्र सिंह से परामर्श लिया। डॉ. सिंह ने मरीज को भर्ती कर आवश्यक जांच के बाद सर्जरी का निर्णय लिया।
मंगलवार को करीब 5 से 6 घंटे तक चले जटिल ऑपरेशन में नाक की नस से 3×3 सेंटीमीटर का ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाल दिया गया। डॉ. भूपेंद्र सिंह ने बताया कि यह ट्यूमर नस में स्थित था, जिससे ऑपरेशन अत्यंत जटिल था। हालांकि वे पहले भी इस प्रकार की सर्जरी कर चुके हैं, इसलिए अनुभव के आधार पर यह चुनौती स्वीकार की गई।
उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन में मरीज को सरकारी शुल्क के अलावा कोई अतिरिक्त खर्च नहीं आया। यदि यही सर्जरी किसी बड़े शहर के निजी अस्पताल में होती, तो लाखों रुपये खर्च हो सकते थे।
करीब छह घंटे चले इस ऑपरेशन में ईएनटी सर्जन डॉ. कबीर, डॉ. प्रियंका, डॉ. कपिल, डॉ. मृत्युंजय मल्होत्रा, डॉ. सुरभि राजोरिया सहित एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. सुशील पटेल, डॉ. प्रिया दीक्षित, डॉ. आशुतोष वर्मा, डॉ. पंकज, डॉ. अजीत, डॉ. विनीत, डॉ. सायबा तथा ओटी स्टाफ से प्रिया और अवधेश कुमार ने सहयोग किया।
कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. एस. के. कौशल ने इस सफल सर्जरी के लिए डॉ. भूपेंद्र सिंह और उनकी पूरी टीम को बधाई दी तथा इसे संस्थान के लिए गर्व का विषय बताया।