विश्व स्लीप डे पर लोहिया संस्थान में सीएमई व कार्यशाला आयोजित, स्लीप एपनिया के प्रति जागरूकता पर जोर

कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) सी. एम. सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। अपने संबोधन में उन्होंने मोटापा और स्लीप एपनिया के बीच गहरे संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया के लगभग 70 से 80 प्रतिशत मरीज मोटापे से ग्रस्त होते हैं,

विश्व स्लीप डे पर लोहिया संस्थान में सीएमई व कार्यशाला आयोजित, स्लीप एपनिया के प्रति जागरूकता पर जोर
PUBLISHED BY MANOJ KUMAR

लखनऊ से शैलेन्द्र शर्मा की रिपोर्ट —

लखनऊ / जनमत न्यूज। विश्व स्लीप डे 2026 के अवसर पर डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (आरएमएलआईएमएस), लखनऊ के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग द्वारा “ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया एवं पॉलिसोमनोग्राफी” विषय पर एक सीएमई एवं हैंड्स-ऑन कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज (एनएएमएस) – यूपी चैप्टर, इंडियन चेस्ट सोसाइटी (आईसीएस) – यूपी चैप्टर तथा स्नोरिंग एंड स्लीप रिलेटेड ब्रीदिंग डिसऑर्डर्स सोसाइटी (एसएसडीएस) के तत्वावधान में किया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) सी. एम. सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। अपने संबोधन में उन्होंने मोटापा और स्लीप एपनिया के बीच गहरे संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया के लगभग 70 से 80 प्रतिशत मरीज मोटापे से ग्रस्त होते हैं, जबकि करीब 90 प्रतिशत मोटे व्यक्तियों में यह बीमारी होने की संभावना रहती है। उन्होंने कहा कि जागरूकता की कमी के कारण इस बीमारी के अधिकांश मामलों का समय पर निदान नहीं हो पाता। उन्होंने इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए पल्मोनरी मेडिसिन विभाग को बधाई दी।

इस अवसर पर पद्मश्री प्रो. राजेन्द्र प्रसाद तथा केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. सूर्यकांत विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। प्रो. राजेन्द्र प्रसाद ने भारत में स्लीप एपनिया की बढ़ती समस्या पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पिछले दो दशकों में इस बीमारी के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, लेकिन आम जनता में इसकी जानकारी अभी भी सीमित है। वहीं प्रो. सूर्यकांत ने कहा कि तेज खर्राटे आना, दिन में अत्यधिक नींद महसूस होना तथा नींद के दौरान सांस रुकना स्लीप एपनिया के प्रमुख चेतावनी संकेत हैं। उन्होंने बताया कि समय पर पहचान और उचित उपचार से उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।

कार्यक्रम की शुरुआत पल्मोनरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अजय कुमार वर्मा के स्वागत संबोधन और परिचयात्मक व्याख्यान से हुई। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में अच्छी नींद को हृदय स्वास्थ्य और समग्र स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. विभा गंगवार ने स्वास्थ्य के लिए नींद के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. अनिल कुमार सिंह (चंदन हॉस्पिटल, लखनऊ) ने स्लीप एपनिया के सही निदान और स्लीप स्टडी रिपोर्ट को समझने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। डॉ. हेमंत कुमार (आरएमएलआईएमएस) ने इसके उपचार में पीएपी थेरेपी और दवाओं की भूमिका पर चर्चा की। डॉ. आशीष झा (कार्डियोलॉजी विभाग, आरएमएलआईएमएस) ने स्लीप एपनिया के हृदय रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं पर पड़ने वाले प्रभाव को विस्तार से समझाया।

केजीएमयू की प्रो. सारिका गुप्ता ने कहा कि बच्चों में आने वाले खर्राटों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि उनमें भी स्लीप एपनिया की समस्या हो सकती है। उन्होंने समय पर जांच और निदान को बेहद महत्वपूर्ण बताया। वहीं सरस्वती डेंटल कॉलेज के डॉ. देवेंद्र चोपड़ा ने स्लीप एपनिया के उपचार में डेंटल उपकरणों और चयनित शल्य चिकित्सा की भूमिका पर जानकारी दी।

कार्यक्रम में अन्य प्रमुख विशेषज्ञों में प्रो. के. बी. गुप्ता (पूर्व विभागाध्यक्ष, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, पीजीआई रोहतक), प्रो. वेद प्रकाश (विभागाध्यक्ष, पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन, केजीएमयू), प्रो. श्वेता कंचन (हिंद इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज), डॉ. ज्योति बाजपेई (केजीएमयू) तथा डॉ. विपुल प्रकाश (मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ) भी शामिल रहे।

कार्यशाला के हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण सत्र में डॉ. मृत्युंजय सिंह, डॉ. पुलकित गुप्ता और डॉ. सुलक्षणा गौतम (आरएमएलआईएमएस) के साथ डॉ. मोहम्मद आरिफ, डॉ. अनुराग त्रिपाठी, डॉ. ऋचा त्यागी, डॉ. दीपक शर्मा और डॉ. शुभ्रा श्रीवास्तव (केजीएमयू) ने प्रतिभागियों को पॉलिसोमनोग्राफी रिपोर्ट स्कोरिंग, स्लीप स्टडी की व्याख्या तथा स्लीप एपनिया के उपचार में पीएपी उपकरणों के व्यावहारिक उपयोग का प्रशिक्षण दिया।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. सागर जैन, डॉ. अमन सक्सेना, डॉ. कमल वर्मा, डॉ. शाश्वत केसरवानी, डॉ. दिलीप और डॉ. सलभ सहित पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के अन्य सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम का समापन आयोजन सचिव डॉ. हेमंत कुमार द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

इस कार्यशाला में इंटरैक्टिव व्याख्यानों और व्यावहारिक प्रदर्शनों के माध्यम से चिकित्सकों को स्लीप से संबंधित श्वसन विकारों के बेहतर निदान और उपचार के लिए प्रशिक्षित किया गया।