एटा: 38 महीने से स्टेट बैंक ने नहीं किया किराए का भुगतान, भवन मालिक ने मुख्य द्वार पर जड़े ताले

उप्र के एटा जनपद में जिले के अलीगंज कस्बे में स्थित स्टेट बैंक के आफ इंडिया की ब्रांच के मुख्य द्वार पर भवन के मालिक ने ताले जड़ दिए है।

एटा: 38 महीने से स्टेट बैंक ने नहीं किया किराए का भुगतान, भवन मालिक ने मुख्य द्वार पर जड़े ताले
Published By- Diwaker Mishra

एटा से नंद कुमार की रिपोर्ट

औरैया/जनमत न्यूज़। उप्र के एटा जनपद में जिले के अलीगंज कस्बे में स्थित स्टेट बैंक के आफ इंडिया की ब्रांच के मुख्य द्वार पर भवन के मालिक ने ताले जड़ दिए है। दरअसल एस बी ई की शाखा वर्षों से संचालित हैं। भवन के मालिक का आरोप है कि पिछले 38 माह से बैंक ने किराए का तय भुगतान नहीं किया है।

बैंक अधिकारियों को नोटिस के माध्यम से अवगत भी करवाया जा चुका है लेकिन बैंक अधिकारियों द्वारा टालमटोल किया जाता रहा। जिसके बाद भवन स्वामी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से नोटिस को बैंक के द्वार पर चस्पा करवाया फिर उसमें ताले लगा दिए। मुख्य शाखा में ताले जड़े जाने से हजारों ग्राहकों के सामने संकट खड़ा हो गया है।

दरअसल, भवन स्वामी रमेश चंद्र पुत्र गिरिराज सिंह निवासी मेन मार्केट, मुन्नी देवी पत्नी रमेश चंद्र,अनिल कुमार गुप्ता पुत्र रमेश चंद्र, रचना गुप्ता पत्नी सुशील कुमार, आरती गुप्ता संदीप कुमार और बैंक के बीच वर्ष 2008 में पचास हजार रुपए प्रति माह के हिसाब से किराया तय हुआ था।

10 वर्षों का एग्रीमेंट दोनों पक्षों की सहमति से हुआ। 2018 में एग्रीमेंट की अवधि समाप्त हो गई पांच वर्षों तक आपसी समझौते पर मेन ब्रांच अलीगंज एसबीआई संचालित रहा।

भवन स्वामी का आरोप है इस दौरान बैंक अधिकारियों को कानूनी तरीके से लिखित और मौखिक रूप से अवगत करवाया गया मगर बैंक अधिकारियों द्वारा कोई सुनवाई नहीं की गई। जनवरी वर्ष 2023 में बैंक द्वारा एक लाख 51 हजार रुपए प्रतिमाह के हिसाब से किराया बढ़ाने का भवन स्वामी को ऑफर लेटर दिया गया लेकिन एग्रीमेंट साइन नहीं किया गया।

इस दौरान भवन स्वामी का आरोप है कि बैंक अधिकारियों को नोटिस के माध्यम से भवन खाली करने के लिए बोला गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। 16 मार्च को भवन स्वामी के अधिवक्ता अंकित प्रताप सिंह शाक्य के माध्यम से नोटिस दिया गया।

जवाब नहीं मिलने पर बैंक के मुख्य द्वार पर नोटिस चस्पा कर भवन के मुख्य द्वारा पर सुशील कुमार गुप्ता और उनके पार्टनर ने बैंक को ताला जड़ दिया जिसकी वजह से शहर के व्यापारियों हजारों ग्राहकों के समक्ष लेन देन का संकट खड़ा हो गया है।

मामले पर भवन स्वामी सुशील कुमार गुप्ता ने बताया 10 वर्ष का बैंक और हमारे बीच एग्रीमेंट था। वह वर्ष 2018 में समाप्त हो गया था। पांच वर्षों तक बैंक और हमारे बीच पुराने समझौते के आधार पर पुराने तय किराए पर संचालित रहा

हमारे द्वारा लागतार किराया बढ़ाने और भवन को खाली करने की कवायद की जाती रही लेकिन बैंक ने न किराया बढ़ाया और न ही भवन खाली किया। 38 महीने का किराया बकाया है। हमारे अनुसार बैंक पर 57 लाख रुपए का किराया बकाया है।