बांदा तहसील बना भ्रष्टाचार का अड्डा, हर कागज के लिए धन की मांग; भ्रष्ट लेखपाल के सरपरस्त बने तहसीलदार

उप्र के बांदा जिले में सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार मवाद की तरह रिस रहा है। खासकर तहसील से जुड़े मामलों में कुछ ज्यादा ही अंधेरगर्दी मची है।

बांदा तहसील बना भ्रष्टाचार का अड्डा, हर कागज के लिए धन की मांग; भ्रष्ट लेखपाल के सरपरस्त बने तहसीलदार
Published By- Diwaker Mishra

बांदा से आशीष सागर दीक्षित की रिपोर्ट

बांदा/जनमत न्यूज़। उप्र के बांदा जिले में सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार मवाद की तरह रिस रहा है। खासकर तहसील से जुड़े मामलों में कुछ ज्यादा ही अंधेरगर्दी मची है। लेखपाल नाम का सरकारी लोकसेवक अथवा कर्मचारी जिन्हें जनता की सेवा और समस्याओं के निदान हेतु अच्छी तनख्वाह के साथ सभी तहसील में तैनाती दी जाती है, वे आजकल बांदा में प्रधानमंत्री शहरी और ग्रामीण योजना में दीमक बनकर लग चुके है।

इससे इतर छात्रों को ई.डब्ल्यू.एस. कागज अथवा आय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र बनवाने में ऐसा मानसिक उत्पीड़न करते है कि यातना की हद पार हो जाती है। कुछ ऐसा ही मामला आज सदर तहसील बांदा के सामने घटित हुआ।

घटनाक्रम के अनुसार थाना देहात कोतवाली अंतर्गत ग्राम जमालपुर निवासी निपुण मिश्रा, जो प्रयागराज मे रहकर पढ़ाई करते है, वे अपना ई.डब्ल्यू.एस. कागज बनवाने सदर तहसील पहुंचे थे। आवेदन पहले से लंबित था तो यह युवक आज लेखपाल सुधीर यादव के पास अपडेट लेने के साथ जानकारी हेतु गया था।

जानकारी देने के बजाय लेखपाल सुधीर यादव ने छात्र निपुण मिश्रा के मुताबिक 5000 रुपया रिश्वत की मांग कर दी। देने में असमर्थ युवा छात्र ने जब तहसीलदार धनंजय पटेल से मिलने की बात कही तो लेखपाल उसको टरकाने लगा।

युवक के अड़ने पर उसको लेखपाल ने अभद्र भाषा का प्रयोग करके अपमानित किया। इतना ही नहीं जब छात्र ने तहसीलदार और एसडीएम नमन मेहता से मिलकर शिकायत करने की बात कही तो लेखपाल सुधीर यादव बोले "तेरे जैसे बहुत आते है" ! कुछ नहीं होगा...!

बात यहीं नहीं रुकी छात्र निपुण मिश्रा के तहसीलदार से मिलने जाने पर लेखपाल और छात्र में कहासुनी शुरू हो गई। लेखपाल संघ में लामबंद सजातीय लेखपाल और घूसखोरी के सरकारी अमले ने मिलकर छात्र की जमकर पिटाई कर दी।

छात्र का चश्मा टूट गया, इस दरम्यान चश्मदीद राहुल सिंह ने तहसीलदार से सवाल भी किए कि युवक को लेखपाल, कर्मचारी घेरकर मार रहें है और आप खड़े है ?

गवाह राहुल सिंह  के सिविल लाइन चौकी के गेट पर दिए मीडिया बयान की मानें तो युवक निपुण मिश्रा को ब्राह्मण होने पर गालियां देते हुए मारा गया। उसने बीच बचाव भी किया। जब पीड़ित युवक एसडीएम सदर नमन मेहता से मिलने गया तो वे मिले नहीं, उल्टा इस मामले पर चुप्पी साधे है।

गौरतलब है कि सदर तहसील से लेकर अन्य सरकारी महकमों तक बाबू और लेखपाल बिना घूस लिए जनता का काम नहीं करते है। रेवड़ी की तरह घूस लेकर शहरी और ग्रामीण पीएम आवास लेखपाल देते है। गरीब आदमी लेखपाल की जांच आख्या का पावर जानकर घूसखोर का नाम नहीं लेता है।

वहीं खतौनी के दाखिल  खारिज से कागजी काम तक पूरा सिस्टम आला अफसरों को पता है लेकिन कार्यवाही के नाम पर जब बात वायरल हो गई तो खानापूर्ति हो जाती है। इस युवा छात्र निपुण मिश्रा के साथ की गई घटना तो बानगी भर है।

किसानों को लेखपाल तहसीलों में बिना रुपया लिए खनन लीज पट्टेधारकों के गाटा नम्बर तक नहीं बतलाते है क्योंकि सिर्फ खंड नम्बर से व्यक्ति सदर रजिस्ट्रार दफ्तर में कागज हासिल नहीं कर सकता है। बांदा मे लेखपाल,तहसीलदार, एसडीएम और खान विभाग का पूरा तंत्र है जो जनता को परेशान करता है।

पीड़ित युवक निपुण मिश्रा ने सिविल लाइन चौकी पहुंचकर मीडिया को अपनी बात बतलाई। साथ ही प्रशासन से दोषी लेखपाल और अन्य पर त्वरित कार्यवाही की मांग की है।