पाकिस्तान ने किया अफगानिस्तान से खुली जंग का ऐलान, लॉन्च किया ऑपरेशन 'गजब लिल-हक'

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खिलाफ खुली जंग का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही पाकिस्तान ने 'गजब लिल-हक' नाम से ऑपरेशन भी लॉन्च किया है।

पाकिस्तान ने किया अफगानिस्तान से खुली जंग का ऐलान, लॉन्च किया ऑपरेशन 'गजब लिल-हक'
Published By- Diwaker Mishra

इस्लामाबाद/जनमत न्यूज़। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खिलाफ खुली जंग का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही पाकिस्तान ने 'गजब लिल-हक' नाम से ऑपरेशन भी लॉन्च किया है। उसका कहना है कि हमने अब अफगानिस्तान के खिलाफ खुली जंग का ऐलान कर दिया है और अब हम पीछे नहीं हटेंगे।

इस दौरान पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने 'दमादम मस्त कलंदर' का जिक्र किया है। सूफी कव्वाली दमादम मस्त कलंदर का अर्थ होता है, हर सांस में मस्ती।

ख्वाजा आसिफ ने कहा, 'हमारा धैर्य जवाब दे गया है। अब आपके खिलाफ हम खुली जंग में हैं। अब दमा दम मस्त कलंदर होगा। पाकिस्तान की सेना कोई समंदर पार से नहीं आई है। हम आपके पड़ोसी हैं और आपके बारे में सब कुछ जानते हैं। आप अंदर से क्या हैं और बाहर से क्या हैं। हम सब जानते हैं। अल्लाह हू अकबर।'

पाकिस्तान बोला- तालिबान ने बना दिया भारत की कॉलोनी

ख्वाजा आसिफ ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान के मौजूदा हालात के लिए तालिबान और भारत की दोस्ती जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि 2021 में जब नाटो की सेनाओं ने अफगानिस्तान छोड़ा था तो उम्मीद की जा रही थी कि अब शांति होगी लेकिन तालिबान ने अफगानिस्तान को भारत की कॉलोनी बना दिया।

इस्लाम की दुहाई देते हुए पाकिस्तान अब अफगानिस्तान पर आरोप लगा रहा है कि उसने इस्लाम में महिलाओं को दिए अधिकारों को भी छीन लिया है। इसके अलावा लोगों के सामान्य मानवाधिकार भी छीन लिए गए हैं।

अफगानिस्तान के प्रवक्ता ने कहा- जंग हमारी ओर से भी जारी

दूसरी ओर यदि पाकिस्तान ने हमला बोला है तो फिर अफगानिस्तान भी हमलावर है। अफगान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा हम इस हमले की निंदा करते हैं। पाकिस्तान ने कायरतापूर्ण हमला किया है और हम डट कर उसका विरोध करते हैं।

बता दें कि अफगानिस्तान का दावा है कि उसके हमलों में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं। वहीं ऐसा ही दावा करते हुए पाकिस्तान का कहना है कि हमने 133 को मार गिराया है।

बता दें कि दोनों देशों के बीच दशकों से डूरंड लाइन को लेकर विवाद रहा है और अफगानिस्तान का कहना है कि हम इस सीमा को नहीं मानते। दरअसल खैबर पख्तूनख्वा की बड़ी आबादी पख्तून है और उससे अफगानिस्तान का सांस्कृतिक जुड़ाव है।